राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता की फाइल बनी ‘फुटबॉल’

उज्जैन: अटल खेल मेले में शामिल हो चुकी प्रतिष्ठित कैप्टन रूप सिंह हॉकी गोल्ड प्रतियोगिता इस बार संकट के दौर से गुजर रही हैं. जनवरी में प्रस्तावित इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के आयोजन को लेकर अब तक राष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन, दिल्ली से आवश्यक अनुमति नहीं मिल पाई है. अनुमति से संबंधित फाइल नगर निगम स्तर पर ही अटकी हुई है, जिससे पूरा आयोजन असमंजस की स्थिति में आ गया है.

उज्जैन नगर निगम द्वारा करीब 45 वर्ष पूर्व कैप्टन रूप सिंह हॉकी प्रतियोगिता की शुरुआत की गई थी. समय-समय पर यह आयोजन उज्जैन की पहचान बना और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा। वर्ष 2016 में इसे अटल खेल मेले में भी शामिल किया गया था. तत्कालीन सभापति सोनू गेहलोत के कार्यकाल में लुप्त होते इस खेल को फिर से जीवंत करने का प्रयास किया गया.

सीएम के गृह नगर का होगा नाम रोशन
अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में एक बार फिर इस प्रतियोगिता को भव्य स्तर पर आयोजित करने की योजना बनाई गई थी. यदि आयोजन बगैर किसी बाधा के संपन्न होता है तो एक बार फिर शहर का नाम रोशन होगा और कई खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा.

25 लाख का बजट पास
नगर निगम ये प्रतियोगिता लगभग 14 जनवरी के आसपास करवाना चाहता है, इसके लिए निगम बजट में प्रावधान भी किया जा चुका है और करीब 25 लाख रुपये खर्च के अनुमान है. बावजूद इसके, ऑल इंडिया हॉकी फेडरेशन से अनुमति मांगे जाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है. अनुमति मिलने के बाद ही मैदान की तैयारी, टीमों का चयन, रेफरी और अधिकारियों की नियुक्ति सहित अन्य व्यवस्थाएं संभव हो पाएंगी.

देशभर से आएंगी हॉकी टीम
इस प्रतियोगिता में देशभर से खिलाड़ी, रेफरी और हॉकी से जुड़े अधिकारी उज्जैन पहुंचते हैं. नगर निगम द्वारा खिलाड़ियों और अधिकारियों के ठहरने, भोजन सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं. विजेता टीम को गोल्ड ट्रॉफी के साथ नकद पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है. प्रतियोगिता का आयोजन क्षीरसागर स्टेडियम में प्रस्तावित है, जहां ग्राउंड को तैयार करने में करीब 10 दिन का समय लगता है, लेकिन इसके लिए भी समय पर अनुमति मिलना जरूरी है.

आयोजन को लेकर उधेड़बुन
आयोजन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है. भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के जनप्रतिनिधियों को आयोजन समिति में शामिल किया गया है. संयोजक की जिम्मेदारी भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी को सौंपी गई है, जबकि सहसंयोजक नेता प्रतिपक्ष रवि राय हैं. समिति में प्रकाश शर्मा, सत्यनारायण चौहान, अनिल गुप्ता, छोटेलाल मंडलोई और अर्पित दुबे को भी सदस्य बनाया गया है.

टैगोर बोले संतोष रखो
बताया जा रहा है कि अनुमति से संबंधित फाइल इस समय अपर आयुक्त संतोष टैगोर के पास है, जो आगे आयुक्त के माध्यम से दिल्ली स्थित राष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन को भेजी जानी है. वहीं यह तय होना है कि कौन-कौन सी टीमें आएंगी, खिलाड़ी कौन होंगे और प्रतियोगिता का पूरा स्वरूप क्या रहेगा. इस पूरी प्रक्रिया में देरी के चलते आयोजन पर संकट के बादल गहराते जा रहे हैं. अपर आयुक्त संतोष टैगोर से जब फाइल के संबंध में आयोजन समिति के सदस्यों ने चर्चा की तो उन्हें कहा कि सब ठीक होगा संतोष रखो.

20 दिन पहले आयोजन की घोषणा
नवभारत को मिली जानकारी के अनुसार महापौर मुकेश टटवाल ने 20 दिन से अधिक समय पहले ही आयोजन समिति का गठन कर प्रतियोगिता की घोषणा कर दी थी. यदि किसी कारणवश आयोजन नहीं हो पाता है, तो इससे प्रतिभावान खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिलने से वंचित होना पड़ेगा. उज्जैन सहित अन्य स्थानों के खिलाड़ी इस प्रतियोगिता के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं.

नगदी के साथ गोल्ड ट्रॉफी
प्रस्तावित रूप से करीब 16 टीमें उज्जैन पहुंच सकती हैं। सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों के बाद विजेता टीम को गोल्ड ट्रॉफी और नकद पुरस्कार दिया जाना है। फिलहाल सवाल यही है कि जिम्मेदार अधिकारी फाइल को कब आगे बढ़ाते हैं, राष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन से कब अनुमति मिलती है और प्रतियोगिता तय समय पर हो पाती है या नहीं। तब तक अधिकारी और जनप्रतिनिधि पशोपेश में हैं और कैप्टन रूप सिंह हॉकी गोल्ड प्रतियोगिता पर संकट के बादल छाए हुए हैं

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