अदालत ने इमरान खान, उनकी पत्नी की गिरफ्तारी पर 27 जनवरी तक रोक लगाई

इस्लामाबाद, (वार्ता) इस्लामाबाद की एक स्थानीय अदालत ने मंगलवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की पांच आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, इनमें नौ मई की हिंसा से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
इस्लामाबाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक इन पांच संबंधित मामलों में कोई गिरफ्तारी न की जाए। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पूर्व जमानत की अवधि भी बढ़ा दी है, जिससे उनकी जमानत याचिकाओं के लंबित रहने तक उन्हें अस्थायी कानूनी सुरक्षा मिल गई है। उन्हें यह अंतरिम राहत 27 जनवरी 2026 तक प्रदान की गयी है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अफजल मजूका ने इस मामले की सुनवाई की। पीटीआई संस्थापक के अदालत में उपस्थित न हो पाने के कारण जमानत याचिकाओं पर दलीलें पेश नहीं की जा सकीं। इसके परिणामस्वरूप न्यायाधीश ने मामले को स्थगित कर दिया और श्री खान को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से या वीडियो लिंक के माध्यम से अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके बाद अदालत ने औपचारिक रूप से जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 27 जनवरी तक के लिए टाल दी।
अदालत में श्री खान और उनकी पत्नी की ओर से अधिवक्ता शमसा कयानी ने पैरवी की। उन्होंने स्थगन की मांग करते हुए अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल की अनुपस्थिति में ठोस दलीलें पेश नहीं की जा सकतीं।
यह अंतरिम राहत तोशाखाना-2 मामले में विस्तृत फैसले के कुछ ही समय बाद आई है, जिसमें श्री खान और बुशरा बीबी को 17 साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। उस मामले में अदालत ने व्यवस्था दी थी कि सरकारी उपहारों को अवैध रूप से अपने पास रखा गया और उन्हें आधिकारिक तोशाखाना में जमा नहीं किया गया। दोनों पर 1.64 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (59,000 डॉलर) का जुर्माना भी लगाया गया था।
वर्ष 2018 से 2022 तक प्रधानमंत्री रहे श्री खान कई आरोपों का सामना कर रहे हैं, जिनमें से कई मामले नौ मई की हिंसा से जुड़े हैं। श्री खान की गिरफ्तारी के बाद उनके हजारों समर्थकों ने अधिकारियों के खिलाफ देशव्यापी मार्च निकाला था, जिससे भारी हिंसा हुई थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प हुई, सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की गई और पहली बार सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले हुए।
उल्लेखनीय है कि नौ मई के दंगों के कारण श्री खान पर राजद्रोह, आतंकवाद, हत्या के प्रयास, फर्जी रसीदें जमा करने और रिश्वतखोरी जैसे आरोप लगाए गए हैं। बुशरा बीबी के खिलाफ भी जाली रसीदें जमा करने का एक अलग मामला दर्ज है। अदालत के अंतरिम आदेशों के साथ अब दोनों को अगली सुनवाई से पहले न्यायिक निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा।

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