
जबलपुर। पति के द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में पेश की गयी पत्नी ने युगलपीठ को बताया कि वह हमेशा से पति के साथ रहना चाहती है। परिजन ऐसा करने पर आत्महत्या करने की धमकी दे रहे हैं। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस राम कुमार चौबे युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए कहा है कि शादीशुदा होने के कारण कोई भी धमकी उनके वैवाहिक रिश्ते को खत्म नहीं कर सकती है। युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए पुलिस को निर्देशित किया है कि वह सुरक्षा में पत्नी को पति के पास पहुॅचाये।
सिवनी के बरघाट निवासी युवक की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था कि उसने छिंदवाड़ा निवासी युवती से रजिस्टर्ड विवाह किया है। उसकी पत्नी को मायके पक्ष ने जबरदस्ती बंधक बनाकर रखा हुआ है। याचिका में राहत चाही गयी कि थी उसकी पत्नी को मायके पक्ष से मुक्त करवाया जाये। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए पत्नी को पेश करने के आदेश पुलिस को दिये थे। हाईकोर्ट के आदेश पर छिंदवाड़ा पुलिस के द्वारा पत्नी को न्यायालय में पेश किया गया।
पत्नी ने युगलपीठ को बताया कि वह हमेशा अपने पति के साथ रहना चाहती है। उनका कहना है कि मैं अगर पति के साथ रहने का फैसला करती है तो आत्महत्या कर लेंगे। उसे अपने परिवार वालों से गलत और गैर-कानूनी दखल का भय है। युगलपीठ से आग्रह किया गया कि हमें ऐसी धमकियों से बचाया जाये।
युगलपीठ ने अपने फैसले में कहा है कि दस्तावेज के अनुसार दोनों बालिग हैं और दोनों की सही तरीके से शादी हुई और उनका विवाह रजिस्टर्ड है। सिवनी पुलिस अधीक्षक खतरे की जांच करते हुए दोनों को सही सुरक्षा प्रदान करें। पुलिस अधीक्षक संबंधित थाने बरघाट को निर्देशित करें कि दम्पति अपने साथ गलत होने की शिकायत करती है तो उस पर संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्वक तरीके से देखे। युगलपीठ ने पत्नी को पुलिस सुरक्षा में पति के घर पहुॅचाने के निर्देश पुलिस को दिये है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया।
