छतरपुर: मासूम बच्चियों को बहला-फुसलाकर देह व्यापार के दलदल में धकेलने वाली महिला आरोपी संतोषी उर्फ बिमलेश तिवारी को छतरपुर की अदालत ने 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला 2024 में महिला थाना में दर्ज हुआ था, और पुलिस की तत्परता व कोर्ट की गंभीरता के चलते महज एक साल के भीतर दोषियों को अंजाम तक पहुंचा दिया गया। इस मामले में डीपीओ प्रवेश अहिरवार ने विस्तृत जानकारी दी।
क्या है पूरा मामला?
अदालत में पेश किए गए सबूतों से साबित हुआ कि आरोपी संतोषी नाबालिग बच्चियों को पहले अपने जाल में फंसाती थी। इसके बाद उन्हें बंधक बनाकर रखा जाता था और जबरन देह व्यापार करवाया जाता था। जब बच्चियां इसका विरोध करती थीं, तो उनके साथ मारपीट की जाती और जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं।
सजा का ब्यौरा: किस जुर्म में कितनी कैद?
कोर्ट ने आरोपी संतोषी को अलग-अलग धाराओं में दोषी मानते हुए सजा सुनाई है:
देह व्यापार (अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम): इस कानून के तहत दो अलग-अलग धाराओं में 5 साल और 10 साल की सजा सुनाई गई है, साथ ही कुल 30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
नाबालिगों की खरीद-फरोख्त (Trafficking): इस गंभीर अपराध के लिए 8 साल की कैद और 30 हजार रुपए का जुर्माना।
बंधक बनाना: बच्चियों को कैद करके रखने के आरोप में 2 साल की सजा।
मारपीट: विरोध करने पर मारपीट के लिए 1 साल की सजा।
धमकाना: जान से मारने की धमकी देने के लिए 2 साल की कैद और 1000 रुपए का जुर्माना।
सह-आरोपी हरि सिंह राजपूत भी दोषी करार
इस घिनौने अपराध में संतोषी का साथ देने वाले हरि सिंह राजपूत को भी अदालत ने दोषी पाया है। उस पर देह व्यापार की कमाई खाने और धमकाने का आरोप सिद्ध हुआ है। कोर्ट ने हरि सिंह को 2-2 साल की जेल और 1-1 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।
पुलिस और न्याय व्यवस्था की जीत
यह फैसला इस लिहाज से भी अहम है कि मुख्य आरोपी का नाम पहले भी इस तरह के अनैतिक कार्यों में सामने आ चुका था। साल 2024 में केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने पुख्ता सबूत जुटाए, जिसके आधार पर कोर्ट ने एक साल के अंदर ही फैसला सुनाकर पीड़ितों को न्याय दिया।
