मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी : सतीश महाराज

ग्वालियर। कंपू महावीर भवन में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन प्रसिद्ध भागवताचार्य सतीश महाराज ने कहा कि सातवें दिन की भागवत कथा सुनने से पूरे सप्ताह की कथा का फल प्राप्त होता है। यह कथा जीवन को पवित्र और सन्मार्ग पर चलने में सहायक होती है। जिन लोगों के जीवन में भागवत कथा या धर्म का समावेश नहीं होता, उनके जीवन में कोई ना कोई विध्न अवश्य आता है। व्यास पीठ से महाराज जी ने कहा कि ठाकुर जी को भाव से बांधा सुदामा जी ने। कहते हैं मुझे धन इसलिए नहीं दिया यदि धन आ जाता तो हरि भजन नहीं कर पाता उन्होंने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि जिनकी मित्रता की मिसाल आज भी दी जाती है आप सोचो कृष्ण सुदामा की मित्रता कितनी महान रही होगी। कथा के अंत में परीक्षित सुमन प्रेम नारायण रूबी रजत डॉक्टर प्रशिल डॉक्टर रिचा श्रीमती पुष्पा श्रीमती लक्ष्मी श्रीमती मालती गोपाल दास गोयल राजू गोयल ने भागवत महापुराण की आरती उतारी।

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