मध्य प्रदेश: विकसित भारत का अग्रदूत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ विजन को वास्तविक धरातल पर उतारते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को औद्योगिक नवाचार का राष्ट्रीय मॉडल बना दिया है. सुशासन, नीति-स्थिरता और पारदर्शिता के त्रिवेणी संगम से प्रदेश की आर्थिक रफ्तार को नई दिशा मिली है. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में शीर्ष स्थान, ‘टॉप अचीवर स्टेट’ का राष्ट्रीय सम्मान, और हर जिले में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट इस परिवर्तन की ठोस मिसालें हैं. यह उपलब्धि केवल सरकारी पुरस्कार नहीं, बल्कि उस दीर्घदृष्टि का प्रमाण है जिसने राज्य को औद्योगिक, तकनीकी और निवेशीय दृष्टि से नई पहचान दी है. डॉ. मोहन यादव का मानना है कि ‘औद्योगिक विकास केवल शहरों में सीमित नहीं रहना चाहिए, यह हर जिले तक पहुंचाना चाहिए.’ यही सोच विकेन्द्रीकरण के उस नए मॉडल में बदली है, जिसने विकास को जमीनी स्वरूप दिया है. रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और जिला-स्तरीय निवेश सम्मेलनों से उज्जैन, रीवा, सागर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में हजारों करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए हैं. इससे रोजगार का विकेंद्रीकरण हुआ है, और ग्रामीण युवाओं को अपने ही क्षेत्र में अवसर मिलने लगे हैं. लघु और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देकर राज्य ने ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को वास्तविक रूप दिया है. टेक्नोलॉजी-फर्स्ट’ दृष्टिकोण के तहत मध्य प्रदेश ने पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़ते हुए आईटी, फिनटेक, ड्रोन, एआई और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में कदम रखा है. इंदौर में आयोजित ‘टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव’ इसी नवाचार यात्रा का प्रतीक है. जनविश्वास बिल 2024 के माध्यम से नियमों को सरल बनाना, सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणाली को सशक्त करना, और पारदर्शिता को नीति का हिस्सा बनाना,इन सुधारों ने निवेशकों का भरोसा मज़बूत किया है. मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास के लाभ को समाज तक पहुंचाने पर केंद्रित है. कौशल विकास मिशन, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना, और युवा उद्यमी कार्यक्रमों ने युवाओं को उद्योग से जोड़ा है. इससे उत्पादन, रोजगार, और आत्मनिर्भरता का एक समावेशी मॉडल तैयार हुआ है. मुख्यमंत्री का स्पष्ट लक्ष्य है,2047 तक मध्य प्रदेश को भारत का सर्वाधिक आत्मनिर्भर, नवोन्मेषी और उद्योगोन्मुख राज्य बनाना. इस दृष्टि के तीन स्तंभ हैं,स्पीड, स्केल, और स्किल. परियोजनाओं के समयबद्ध कार्यान्वयन, निवेश-उत्पादन की वैश्विक प्रतिस्पर्धा, और विश्वस्तरीय मानव संसाधन निर्माण पर राज्य का ध्यान केंद्रित है.दरअसल, मध्य प्रदेश का ‘टॉप अचीवर स्टेट’ बनना किसी एक पुरस्कार का परिणाम नहीं, बल्कि स्थिर नेतृत्व, स्पष्ट नीति, और सतत परिश्रम की परिणति है. डॉ. मोहन यादव ने सिद्ध किया है कि जब नेतृत्व का दृष्टिकोण जन-हितकारी और व्यावहारिक हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद विकास असंभव नहीं रहता. आज मध्य प्रदेश की पहचान बदल चुकी है,अब यह ‘बिमारू’ नहीं, बल्कि विकसित भारत का अग्रदूत है.

 

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