आवारा कुत्तों की नसबंदी का काम अटका, अपात्र ठेकेदारों के कारण अधर में एबीसी सेंटर

छतरपुर। शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे डॉग बाइट के मामलों में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। इस समस्या पर रोक लगाने के लिए नगर पालिका द्वारा शुरू किया जाने वाला एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर का काम एक बार फिर अधर में लटक गया है।

दरअसल, जिन फर्मों ने टेंडर डाले थे, वे अपात्र निकलीं। उनके पास एनीमल वेलफेयर सोसाइटी का आवश्यक पंजीकरण नहीं था, जिसके बिना इस कार्य की अनुमति नहीं दी जा सकती। इससे पहले भी दो बार टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, लेकिन कोई योग्य ठेकेदार आगे नहीं आया। अब चौथी बार फिर से टेंडर प्रक्रिया की जाएगी।

शहर के सौरा रोड, देरी रोड, बजरंग नगर और विश्वनाथ कॉलोनी सहित कई इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। रात के समय झुंड बनाकर घूमने वाले ये कुत्ते लोगों के लिए डर का कारण बन गए हैं। बाइक और साइकिल सवारों पर झपटना अब इनकी आदत बन चुकी है।

जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, हर महीने औसतन 400 से ज्यादा लोग डॉग बाइट के बाद रेबीज का टीका लगवाने आते हैं। पिछले वर्ष जनवरी में एक आवारा कुत्ते ने 130 से अधिक लोगों पर हमला किया था।

नगर पालिका का कहना है कि अगले महीने दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि किसी पंजीकृत संस्था को यह कार्य सौंपा जा सके। अधिकारियों का दावा है कि नसबंदी अभियान शुरू होने के बाद कुत्तों की संख्या में कमी आने के साथ डॉग बाइट के मामलों में भी गिरावट देखी जाएगी।

माधुरी शर्मा, सीएमओ का कहना है:
“टेंडर में जो आवेदक थे, उनके पास एनीमल वेलफेयर सोसाइटी का पंजीयन नहीं था। इसलिए टेंडर दोबारा कराए जाएंगे।

 

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