
भोपाल: सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने रीवा जिले में सहकारिता विभाग और उपार्जन प्रक्रिया में घोटाले का आरोप लगाया हैं। उन्होंने कहा कि इन विभागों में हुए लेन-देन में करीब 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितताएं हुई हैं। मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करते हुए सीबीआई जांच की मांग की।
मिश्रा ने बताया कि लाखों किसानों को सहकारी समितियों के सदस्य के रूप में दिखाया गया, जबकि उनके रिकॉर्ड मौजूद ही नहीं हैं। किसानों से शेयर अमाउंट और कैशबैक के नाम पर रकम काटी गई, लेकिन उन्हें कभी भुगतान या ब्याज नहीं मिला। उन्होंने तथाकथित ‘लाल पर्ची घोटाले’ का जिक्र करते हुए कहा कि कई मृतक किसानों के नाम पर भी लोन और बीमा क्लेम जारी किए गए। मऊगंज और डभोरा शाखाओं के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि फर्जी खातों के जरिए निजी लोगों को लाभ पहुंचाया गया।
विधायक मिश्रा ने आरोप लगाया कि भोपाल से आई जांच टीम ने गड़बड़ियां पकड़ने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि संबंधित अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्री और विभागीय अधिकारी दोषियों को बचा रहे हैं और ईमानदार कर्मचारियों की रिपोर्टों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
मिश्रा ने बताया कि उपार्जन के दौरान अपात्र और मृत किसानों के नाम से फर्जी पंजीयन किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि रीवा कलेक्टर ने कुछ चुनिंदा समितियों को फायदा पहुंचाया, जबकि महिला समूहों और स्वयं सहायता समूहों को हाशिए पर रखा। उन्होंने कहा कि 59 किसान आज भी अपने भुगतान के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि भ्रष्ट अधिकारी ऐश कर रहे हैं।
उन्होंने एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए बताया कि आर.एम. शर्मा, जो एक खाद्य एजेंसी में वरिष्ठ अधिकारी हैं, फर्जी डिग्रियों के आधार पर नियुक्त किए गए और अब वरिष्ठ अफसरों, विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भांजी ऋतु चौहान के संरक्षण में कार्यरत हैं।
मिश्रा ने इस पूरे घोटाले को ‘व्यापम से भी बड़ा घोटाला’ करार देते हुए रीवा के वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल हटाने और सीबीआई जांच की मांग की, ताकि किसानों को न्याय और भ्रष्टाचारियों को सजा मिल सके।
