नयी दिल्ली 07 नवंबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से आभासी माध्यम से चार वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
श्री मोदी जिन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगी, उनमें वाराणसी- वंदे भारत एक्सप्रेस, लखनऊ-सहारनपुर वंदे भारत एक्सप्रेस, फिरोजपुर-दिल्ली वंदे भारत, और एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन शामिल है।
ट्रेनसंख्या 02582 बनारस-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सुबह पांच बजकर 25 मिनट पर वाराणसी से खुलेगी और रात 11 बजे खजुराहो पहुंचेगी। यह गाड़ी वाराणसी, विंध्याचल, प्रयागराज छिवकी, चित्रकूट धाम, बांदा, महोबा स्टेशनों पर ठहरेगी और आखिर में खजुराहो पहुंचेगी। यह ट्रेन सात घंटा 45 मिनट में वाराणसी से खजुराहो तक का सफर तय करेगी। गुरुवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी।
इसी तरह से ट्रेन संख्या 26504 लखनऊ-सहारनपुर वंदे भारत एक्सप्रेस 07 घंटा 45 मिनट में लखनऊ से सहारनपुर की दूरी तय करेगी। यह ट्रेन लखनऊ, सीतापुर, सीतापुर सिटी, शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद, नजीबाबाद, रुढ़की और सहारनपुर रुकेगी। इससे मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुगम तथा त्वरित अंतर-शहर यात्रा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। बुधवार को छोड़कर सप्ताह के अन्य बाकी सभी दिनों में चलेगी।
ट्रेन संख्या 26462 फिरोजपुर-दिल्ली वंदे भारत इस रूट पर सबसे तेज़ चलने वाली ट्रेन होगी, जो अपनी यात्रा मात्र 6 घंटे 30 मिनट में पूरी कर लेगी। फिरोजपुर-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस राष्ट्रीय राजधानी और पंजाब के प्रमुख शहरों, जैसे फिरोजपुर, बठिंडा और पटियाला, के बीच संपर्क को सुदृढ़ करेगी। इस ट्रेन से व्यापार, पर्यटन और रोज़गार के अवसरों को बढ़ावा मिलने, सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने और राष्ट्रीय बाज़ारों के साथ बेहतर एकीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह ट्रेन फिरोजपुर, बटिंडा, धुरी, पटियाला, अंबाला कैंट, कुरुक्षेत्र, पानीपत में रूकेगी और आखिर में दिल्ली कैंट पहुंचेगी। यह ट्रेन बुधवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन परिचालित होगी।
दक्षिण भारत में, ट्रेन संख्या 26651 एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस यात्रा समय में 2 घंटे से अधिक की कमी लादेगी, जिससे यह यात्रा 08 घंटे 40 मिनट में पूरी हो जाएगी। एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस प्रमुख आईटी और वाणिज्यिक केंद्रों को जोड़ेगी, जिससे प्रोफेशनलों, छात्रों और पर्यटकों को तेज़ और अधिक आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा। यह रूट केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच आर्थिक कार्यकलापों और पर्यटन को बढ़ावा देगा, जिससे क्षेत्रीय विकास और सहयोग में सहायता मिलेगी।
