
सीहोर।सीहोर नगरपालिका में कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक की शुरुआत की गई है. यह नई व्यवस्था हाजिरी को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है, लेकिन शुरुआती चरण में कुछ तकनीकी दिक्कतें भी सामने आई हैं. कर्मचारी दिन भर मोबाइल के सामने हाजिरी लगाने का प्रयास करते रहे, लेकिन मोबाइल ने उनका चेहरा ही नहीं पहचाना. इसके अलावा सर्वर का डाउन रहना भी दिक्कत देता रहा. मजबूरन कई कर्मचारियों की हाजिरी नहीं लग सकी तो फिर रजिस्टर पर हाजिरी लगाई जा सकी.
नगरीय निकाय में एक नवंबर से फेस रिकग्निशन से अटेंडेंस लगाने का नियम भले ही लागू कर दिया गया हो, लेकिन विभाग ने इस आदेश को जारी करने से पहले व्यवहारिक चीजें नहीं देखीं. यही वजह है कि पहले दिन सीहोर नपा में 30 प्रतिशत कर्मचारी ही फेस रिकग्निशन से अटेंडस लगा पाए. कई कर्मचारी अटेंडेंस लगाने के लिए परेशान होते रहे. कभी सर्वर हेंग होने तो कभी नेटवर्क के कारण उनकी अटेंडेंस नहीं लग सकी है. वहीं दूसरी ओर नपा के कर्मचारियों एक वर्ग ऐसा भी है जिनके पास स्मार्ट फोन ही नहीं हैं. ऐसे कर्मचारियों की संख्या नपा में 300 से ज्यादा है. इनमें मस्टर पर काम करने वाले कर्मचारी और आउटसोर्स के कर्मचारी शामिल हैं. इनमें कई कर्मचारियों को 10 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है, वे इस वेतन में घर का खर्चा चलाएं या फिर स्मार्ट फोन खरीदें. सीहोर नपा में कुल 681 अधिकारी-कर्मचारी हैं.
उल्लेखनीय है कि शासन ने एक नवंबर से हर नगरीय निकाय में फेस रिकग्निशन सिस्टम से हाजिरी लगाने के आदेश दिए थे. एक नवंबर को शनिवार और 2 को रविवार के बाद 3 नवंबर को कार्यालय खुले तो लोग अटैंडेंस के लिए परेशान होते रहे. हालांकि विभाग का दावा है 30 अक्टूबर तक हर कर्मचारी-अधिकारी का डाटा आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से लिंक कर लिया गया है. आदेश का उद्देश्य ऐसे स्टाफ की पहचान करना था जो काम पर नहीं आते, लेकिन उनका वेतन निकलता रहता है. सोमवार को नपा में सिर्फ 30 प्रतिशत कर्मचारी ही ऑनलाइन अटेंडेंस लगा पाए हैं. कर्मचारी परेशान हैं कि यदि उनकी अटेंडेंस ऑनलाइन नहीं लगी तो उनके वेतन का भुगतान होगा भी या नहीं. ऐसे में नपा के कर्मचारियों की अटेंडेंस रजिस्टर पर ली गई है.
10 हजार के वेतन में स्मार्ट फोन कैसे खरीदें
जिला मुख्यालय की नगर पालिका में कुल 681 अधिकारी-कर्मचारियों में से 176 कर्मचारी नियमित और 175 कर्मचारी स्थाई हैं। वहीं मस्टर पर भी 225 कर्मचारी काम कर रहे हैं. इसके अलावा आउटसोर्स से 100 कर्मचारी और 5 संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं. मस्टर पर काम कर रहे कर्मचारी और आउटसोर्स कर्मचारियों में से अधिकांश के पास स्मार्ट फोन ही नहीं हैं, क्योंकि इनमें से अधिकांश कर्मचारियों को मासिक भुगतान करीब 10 हजार रुपए के मिलता है. ऐसे में यदि यह स्मार्ट फोन खरीदेंगे तो उनके घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा.
