बैतूल: जिला अस्पताल में करोड़ों रुपए की लागत से बना 50 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) भवन अभी तक मरीजों के काम नहीं आ सका है। भवन का हैंडओवर तक नहीं हुआ है, न ही स्टाफ की नियुक्ति और जरूरी उपकरणों की व्यवस्था हो पाई है।अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, ट्रांसफार्मर और इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य अधूरा है, जिसके चलते सीसीयू शुरू नहीं हो सका। इस लापरवाही का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों को पर्याप्त सुविधा न मिलने के कारण हर दिन कई मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि करोड़ों की परियोजना के बावजूद योजना और प्रबंधन की कमी से जनता को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। भवन का निर्माण होना उपलब्धि नहीं है, जब तक उसमें इलाज शुरू न हो। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब डॉक्टर, नर्स और तकनीशियन की नियुक्ति ही नहीं हुई, तो इतनी महंगी बिल्डिंग का क्या औचित्य था।
बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग ने यूनिट संचालन के लिए करीब 80 पदों का प्रस्ताव भोपाल भेजा है, जिनमें डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन और वार्ड बॉय शामिल हैं। दो बार पत्राचार होने के बावजूद शासन से मंजूरी नहीं मिली। वहीं, वेंटिलेटर और अन्य उपकरणों की खरीदी की टेंडर प्रक्रिया भी ठप पड़ी है।कुछ माह पहले कलेक्टर ने भवन का निरीक्षण किया था, जिसमें निर्माण कार्य में कई तकनीकी खामियां और फिनिशिंग की कमियां सामने आईं। सुधार के निर्देश दिए गए, जिसके बाद निर्माण एजेंसी ने काम की गति और धीमी कर दी। अब तक न तो इलेक्ट्रिकल फिटिंग पूरी हुई है और न ही भवन स्वास्थ्य विभाग को सौंपा जा सका है।
पार्किंग तोड़कर बनाया गया भवन
सीसीयू भवन के निर्माण के लिए पहले से बनी 75 लाख की पार्किंग तोड़ी गई, वहीं 2 करोड़ की लागत से तैयार बैलून अस्पताल को भी खोलना पड़ा। निर्माण के दौरान अस्पताल परिसर की कई बेंचें और ढांचा ठेकेदार ने तोड़ दिया। पुराने चार मंजिला अस्पताल भवन से सीसीयू को जोड़ने के लिए एक ब्रिज बनाया गया, जिसके लिए पुराने भवन में तोड़फोड़ करनी पड़ी।
जानकारी के अनुसार, 35 लाख रुपए का ऑक्सीजन प्लांट भी निर्माण कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बावजूद क्रिटिकल केयर यूनिट अब तक चालू नहीं हो पाई है।
इनका कहना है
डॉ. जगदीश पोरे, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल बैतूल ने कहा,ट्रांसफार्मर और इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य अधूरा है। स्टाफ की पदस्थापना के लिए पत्राचार किया गया है और यूनिट संचालन को लेकर शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है।
