उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के प्रांगण में पिछले तीन साल से संचालित एक वर्चुअल रियलिटी सेंटर एक नए विवाद के केंद्र में आ गया है. मंदिर की भस्मारती के वर्चुअल दर्शन (150 रुपये प्रति श्रद्धालु) कराने के लिए कथित तौर पर ठेका लेकर चल रहे इस सेंटर पर अब कुंडली देखने और पूजन-पाठ कराने के दावों को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है.
मंदिर से जुड़े पंडित, पुजारी और पुरोहितों के साथ-साथ रामघाट, सिद्धनाथ और मंगलनाथ जैसे अन्य प्रमुख मंदिरों के पुजारियों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है.
संतुष्टि ना मिले तो पैसे वापस विवाद उस समय और बढ़ गया जब वीआर कंपनी द्वारा कथित तौर पर सोशल मीडिया पर एक पंपलेट और पोस्टर जारी किया गया. इस प्रचार सामग्री में श्रद्धालुओं को 51 रुपये देकर अपनी कुंडली दिखाने और उसके हिसाब से पूजा-पाठ कराने का दावा किया गया है. पोस्टर में यहां तक कहा गया है कि आप पूजा से संतुष्ट नहीं हैं तो आपकी दक्षिणा वापस कर दी जाएगी.
कर्मचारी बने पुजारी
दरअसल वर्चुअल रियलिटी कंपनी के कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार के साथ ही लोगों को फोन लगाना शुरू कर दिया है, और पूजन पाठ के लिए उन्हें भ्रमित किया जा रहा है, श्रद्धालुओं को किस मंदिर में कौन सी पूजा करानी चाहिए ये भी बताया जा रहा है, पुजारी संगठनों का आरोप है कि यह कार्य उनके पारंपरिक अधिकारों और मंदिर की गरिमा का उल्लंघन है.
पुजारी संगठनों ने खोला मोर्चा
वीआर कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से किए जा रहे अन्य धार्मिक कार्यों से उज्जैन के सभी पुजारी संगठन एकजुट हो गए हैं. महाकाल मंदिर, रामघाट, सिद्धनाथ और मंगलनाथ के पुजारियों ने एक मत होकर इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत कर दी है और जल्द ही धरना-प्रदर्शन व आंदोलन करने का मन बना लिया है. पुजारियों ने प्रशासन से इस अवैध गतिविधि को तुरंत बंद कराने की मांग की है.
वीआर कंपनी का खंडन, प्रशासन की आंतरिक जांच
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उज्जैन के प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले ही पुजारियों की शिकायत का संज्ञान लेते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी है. इधर, नवभारत ने जब महाकाल मंदिर प्रांगण में कथित तौर पर चल रहे इस वीआर सेंटर के कर्मचारियों से बात की, तो प्रतीक सक्सेना नामक केयरटेकर ने बताया कि उनकी कंपनी के प्रमुख भोपाल में बैठते हैं और वे तीन साल से महाकाल मंदिर से अनुबंध (कांटेक्ट) लेकर यह प्रकल्प चला रहे हैं. उन्होंने कहा हम सिर्फ वीआर के माध्यम से नियमानुसार दुर्लभ दर्शन करवा रहे हैं. रही बात किसी प्रकार की शिकायत की तो उसकी जानकारी नहीं है, और हमारे यहां पूजन पाठ नहीं कराया जाता है.
अधिकारियों पर सबकी नजर
पुजारी संगठनों के आरोपों और वीआर कंपनी के खंडन के बीच अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच के नतीजों पर टिकी हैं. यह देखना होगा कि मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों के कथित अनधिकृत संचालन को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है
