मानव तस्करी पर नकेल कसना जरूरी

म्यांमार की चार लड़कियों को अलीगढ़ से छुड़ाने और दो कथित तस्करों को गिरफ्तार करने का मामला केवल मानव तस्करी का एक और प्रकरण नहीं है. यह भारत की सीमाओं, शरणार्थी शिविरों और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के बीच मौजूद उन कमजोर कडिय़ों की ओर गंभीर संकेत करता है, जिनका फायदा अंतरराष्ट्रीय मानव तस्कर उठा रहे हैं. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि तस्करी के इस नेटवर्क में नाबालिग लड़कियों को भी शामिल किए जाने की बात सामने आई है.

ग्वालियर जीआरपी की कार्रवाई में सामने आया नेटवर्क कथित तौर पर म्यांमार के शरणार्थी कैंपों से लड़कियों को निकालकर भारत लाने और फिर उनकी जबरन शादी कराने की साजिश से जुड़ा है. यदि जांच में यह तथ्य पुष्ट होता है तो यह मानव तस्करी के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है. नदी और पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से भारत में घुसपैठ कराए जाने की आशंका इस मामले को और गंभीर बनाती है.

इस पूरे घटनाक्रम में एक आरोपी के पास संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त का कार्ड मिलना भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है. किसी शरणार्थी या विस्थापित व्यक्ति के पास वैध दस्तावेज होना उसे अपराध से मुक्त नहीं करता, लेकिन यह जरूर जांच का विषय बनता है कि दस्तावेज वास्तविक है या उसका दुरुपयोग किया गया. जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना होगा कि आरोपी को भारत में रहने और आवाजाही की सुविधा कैसे मिली तथा उसके संपर्कों का दायरा कितना बड़ा है.

ग्वालियर जीआरपी ने जिस तरह ट्रेन में संदिग्ध को पकडऩे के बाद उसकी निशानदेही पर अलीगढ़ पहुंचकर दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया और लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाला, वह सराहनीय है. भाषा की बाधा के बावजूद पुलिस ने पहले तकनीक और बाद में द्विभाषिए की मदद लेकर पीडि़तों से जानकारी हासिल की. इससे यह भी स्पष्ट होता है कि मानव तस्करी के मामलों में केवल पुलिसिया कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. पीडि़तों की भाषा, मनोदशा और सामाजिक स्थिति को समझने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की जरूरत है.

अब इस मामले की जांच केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. एनआईए को सूचना दिया जाना इसलिए महत्वपूर्ण है कि इस नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय कडिय़ों, सीमा पार संपर्कों, धन के लेन-देन और भारत में मौजूद सहयोगियों की पड़ताल हो सके. यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि इससे पहले कितनी लड़कियों को इसी तरीके से भारत लाया गया और उनका क्या हुआ.

मानव तस्करी केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय गरिमा से जुड़ा प्रश्न है. सीमाओं की निगरानी मजबूत करने के साथ रेलवे, पुलिस, आव्रजन एजेंसियों और खुफिया तंत्र के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है. शरणार्थियों की आड़ में यदि कोई संगठित गिरोह महिलाओं और बच्चों को खरीद-फरोख्त की वस्तु बना रहा है तो उसके पूरे नेटवर्क को उजागर करना होगा. चार लड़कियों की बरामदगी एक सफलता है, लेकिन असली काम उस अंधेरे जाल को तोडऩा है, जिसकी परछाईं सीमा पार से देश के भीतर तक पहुंच चुकी है. कुल मिलाकर इस घृणित अपराध पर नकेल कसना जरूरी है.

 

 

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