मुंबई, 06 अक्टूबर (वार्ता) पंजाबी गायक एवं मंच कलाकार गुरदीप मेहंदी ने नवरात्रि के अवसर पर गुजराती गीत ‘मावड़ी’ के जरिए पारंपरिक डाकला शैली को नए अंदाज में पेश किया है। सारेगामा द्वारा प्रस्तुत यह गीत नवरात्रि के उत्सवी माहौल और आधुनिक संगीत का आकर्षक मेल है। पंजाबी संगीत गुरदीप मेहंदी की पहचान का अहम हिस्सा है, लेकिन उन्होंने गुजराती, मराठी, तेलुगु समेत कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी संगीत प्रस्तुत किया है। गुजराती दर्शकों के साथ लंबे समय से जुड़े गुरदीप ने गुजरात की संस्कृति, संगीत और उत्सवों को करीब से समझा है।
‘मावड़ी’ को लेकर गुरदीप मेहंदी ने कहा कि अपना गुजराती गीत गाना लंबे समय से उनकी इच्छा थी और यह उनके लिए सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने कहा कि गुजराती संस्कृति, लोगों की गर्मजोशी और यहां के संगीत एवं त्योहारों की ऊर्जा उन्हें हमेशा आकर्षित करती रही है। उन्होंने डाकला की पारंपरिक धुन में अपनी ऊर्जा जोड़ने को बेहद आनंददायक अनुभव बताया और उम्मीद जताई कि लोग इस गीत पर झूमेंगे और इसे नवरात्रि उत्सव का हिस्सा बनाएंगे। लोक संगीत की लय और नवरात्रि की उमंग से भरपूर ‘मावड़ी’ पारंपरिक डाकला धुन को आधुनिक श्रोताओं तक पहुंचाता है। यह गीत गुरदीप मेहंदी की बहुभाषी संगीत यात्रा में एक और नया अध्याय जोड़ता है।

