नयी दिल्ली 23 सितम्बर (वार्ता) भारत और फ्रांस ने असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा के दौरान हरियाणा में बनने वाले जैतापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर चर्चा की है। फ्रांस के विदेश मंत्रालय और फ्रांस के यूरोपीय मामलों के मंत्रालय में महासचिव सुश्री ऐनी-मैरी डेस्कोटेस और उनके भारतीय समकक्ष विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को इस बारे में बातचीत की।
फ्रांस दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों पक्षों ने फ्रांस द्वारा निर्मित जैतापुर परमाणु संयंत्र और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों सहित उन्नत प्रौद्योगिकी पर चर्चा की।
पोस्ट में कहा गया है , ” महासचिव डेस्कोटेस और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दिल्ली में भारत-फ्रांस असैन्य परमाणु ऊर्जा विशेष कार्य बल की बैठक की सह-अध्यक्षता की। बातचीत में जैतापुर परियोजना, एसएमआर सहित उन्नत तकनीक पर चर्चा हुई और ऊर्जा सुरक्षा एवं निम्न-कार्बन परिवर्तन में परमाणु ऊर्जा की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।”
इसमें कहा गया है , ” दोनों देशों के नेताओं के हाल के दौरों, घनिष्ठ आदान-प्रदान और 2026 में भारत में होने वाले एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन के बीच, यह बातचीत द्विपक्षीय प्राथमिकताओं और वैश्विक चुनौतियों पर हमारी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करती है।”
जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना उत्तर भारत में भारत की पहली परमाणु परियोजना होगी। यह हरियाणा के गोरखपुर नामक एक छोटे से शहर में बनायी जा रही है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मार्च में संसद में इसकी जानकारी दी थी और इसे भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया था। डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंज़ूरी, जो दिसंबर 2022 में समाप्त हो गई थी, का नवीनीकरण किया जा रहा है और पारिस्थितिक और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि जैतापुर संयंत्र के लिए प्रारंभिक मंज़ूरी 2008 में दी गई थी, लेकिन फ्रांसीसी हितधारकों के साथ समझौतों में बदलाव के कारण इसमें देरी हुई। प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 की फ्रांस यात्रा के बाद, जब दोनों पक्षों ने लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों (एएमआर) पर सहयोग करने के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, संयंत्र के लिए तकनीकी समझौतों को अंतिम रूप दिया गया है।
मंत्री ने कहा कि फ्रांसीसी पक्ष के साथ वाणिज्यिक शर्तों को तय करने के लिए चर्चा चल रही है। जैतापुर संयंत्र के चालू होने के बाद, इसमें छह परमाणु रिएक्टर होंगे, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 1,730 मेगावाट होगी, यानी कुल 10,380 मेगावाट—जो 2047 तक भारत के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य का दस प्रतिशत होगा।
एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के तहत सरकार परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए भी खोल रही है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस व्यापक दृष्टिकोण के तहत, हरियाणा में बनने वाले गोरखपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर प्रकाश डाला, जो उत्तर भारत में भारत की पहली परमाणु परियोजना होगी। उन्होंने कहा कि भारत 2070 तक शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य रखता है, ऐसे में जैतापुर परियोजना देश की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और साथ ही परमाणु प्रौद्योगिकी में अग्रणी के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करेगी।
इस बैठक में दोनों देशों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा और रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग सहित भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं की व्यापक समीक्षा की। साथ ही फ्रांस ने यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौते के शीघ्र समापन को भी अपना समर्थन दोहराया है। दोनों देशों ने यूक्रेन में न्यायसंगत तथा स्थायी शांति के प्रयासों, गाजा संकट और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
महासचिव डेस्कोटेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अगले वर्ष फरवरी में भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद किया। नवाचार और नई प्रौद्योगिकी फ्रांस और भारत के बीच सहयोग के उभरते क्षेत्र हैं और दोनों देश वर्ष 2026 को नवाचार वर्ष के रूप में मनायेगें।
सुश्री डेस्कोटेस और श्री मिस्री ने असैन्य परमाणु ऊर्जा और रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग सहित भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। उन्होंने यूक्रेन में न्यायसंगत और स्थायी शांति के प्रयासों, गाजा में चल रहे संकट और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
इसके अलावा सुश्री डेस्कोटेस ने यूरोपीय आयोग और उच्च प्रतिनिधि के बीच 2025 के ‘नए रणनीतिक यूरोपीय संघ-भारत एजेंडा’ पर संयुक्त वक्तव्य के बाद यूरोपीय संघ-भारत संबंधों को प्रगाढ बनाने और इनका दायरा बढाने के लिए भी फ्रांस का समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि फ्रांस यूरोपीय संघ और भारत के बीच महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते के समापन का पूर्ण समर्थन करता है।
फ्रांसीसी अधिकारी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा से भी मुलाकात की।
सुश्री डेस्कोटेस ने विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष डॉ. शशि थरूर से भी शिष्टाचार भेंट की।
महासचिव डेस्कोटेस ने एलायंस फ्रांसेइस डे दिल्ली और कैंपस फ्रांस कार्यालयों के दौरे के साथ अपनी यात्रा का समापन किया। फ्रांस बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों का स्वागत करने के लिए उत्सुक है, इसलिए राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री मोदी ने 2030 तक फ्रांस में 30,000 भारतीय छात्रों की मेजबानी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
