
जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में अनियमितताएं की जांच होने के बावजूद भी शासन एवं विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इस जांच प्रतिवेदन में एक और बात सामने आई है कि विश्वविद्यालय में विगत 3 वर्ष से पहले रेनोवेशन और निर्माण के नाम पर लगभग 627 लाख रुपए की का अनियमित भुगतान किया गया है। जांच कमेटी के अनुसार इस अनियमितता में निर्माण शाखा प्रभारी विनोद जारोलिया सहायक यंत्री जो हाल ही में 30 जून 2025 को सेवानिवृत हुए हैं, उनकी भूमिका निर्माण एवं रिनोवेशन संबंधी कार्यों में संदिग्ध पाई गई है। जिसके लिए जांच दल ने उन पर ठोस कार्यवाही करने प्रतिवेदन में लिखा था, परंतु आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। विदित है कि उच्च शिक्षा विभाग के आदेश अनुसार विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितता को लेकर लेखा शाखा में रीवा की टीम द्वारा 18 और 19 दिसंबर को शिकायत से संबंधित अभिलेखों की जांच और शिकायती बिन्दुओं से संबंधित अभिलेखों की जांच की थी।
कार्यों में नियम प्रक्रिया का पालन नहीं
जांच दल के प्रतिवेदन अनुसार रेनोवेशन के कार्य में भी अनियमितता की कई बातें सामने आ रही थी, जिसमें विश्वविद्यालय में 2022 के पूर्व निर्माण एवं रिनोवेशन कार्य संबंधी कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया। 15 फरवरी 2022 को निर्माण- रिनोवेशन कार्य के लिए ई-निविदा जारी की गई, जिसमें 627.42 लाख रुपए का उल्लेख है। इसके अलावा कथित निविदा मात्र दो समाचार पत्रों में प्रकाशित की गई थी, साथ ही कराए गए कार्यों में नियम प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया एवं समस्त भुगतान अनियमित रूप से किए गए हैं।
बिना गुणवत्ता परीक्षण कर दिया भुगतान
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेनोवेशन कार्य का गुणवत्ता परीक्षण भी नहीं कराया गया था जिसमें विभागों एवं कार्यालयों में कराए गए रिनोवेशन कार्य के गुणवत्ता परीक्षण के लिए समिति नहीं बनाई, बल्कि संबंधित विभाग- आवास के कर्मचारियों से कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लिए गए, इसी आधार रु 627.42 लाख रू. का भुगतान किया गया। इस अनियमितता में निर्माण शाखा प्रभारी विनोद जारोलिया सहायक यंत्री की भूमिका निर्माण एवं रिनोवेशन संबंधी कार्यों में संदिग्ध पाई गई, साथ ही लेखापाल एवं वित नियंत्रक की भूमिका भी प्रमाणित पाई गई।
इनका कहना है
शिकायतें मिलने पर शासन के 20- 11- 2024 के लेटर के निर्देशानुसार जांच की गई थी, जिसकी रिपोर्ट शासन तक पहुंच गई है लेकिन अभी हमारे पास प्राप्त नहीं हुई है। आगे शासन द्वारा जो निर्देश हमको दिए जाएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
प्रो. डॉ राजेश कुमार वर्मा, कुलगुरु
