जबलपुर: महाकोशल के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों व परिजनों को चूहों द्वारा काटने के मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कड़ा रूख अपनाया गया है। मेडिकल अस्पताल में सफाई की व्यवस्था की संभालने वाली एचएलएल इंफ्राटेक सर्विसेस लिमिटेड पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड लगाने के बाद अब अस्पताल प्रबंधन द्वारा कंपनी के सुपरवाइजर और पेस्ट कंट्रोलर को हटाकर नए कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
साथ ही अस्पताल प्रबंधन की ओर से मेडिकल अस्पताल परिसर में पेस्ट कंट्रोल एवं सफाई व्यवस्था संभालने वाली कंपनी का ठेका निरस्त करने पत्र प्रदेश स्तर पर लिखा गया है। इस संबंध में मेडिकल डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने नवभारत को बताया कि पेस्ट कंट्रोल एवं सफाई व्यवस्था में लापरवाही बरतने पर ठेका कंपनी के सुपरवाइजर और पेस्ट कंट्रोलर को हटा दिया गया है और नए कर्मचारियों को इस काम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। श्री सक्सेना ने ये भी बताया कि मेडिकल अस्पताल का हाईट कंपनी से अनुबंध है कि वह अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था दुरूस्त रखे , इस हाईट कंपनी ने किसी और को ठेका देकर रखा है। हमारी ओर से हाईट कंपनी को पत्र लिख दिया गया है कि ठेका कंपनी का ठेका निरस्त किया जाए।
कुछ दिनों पहले मरीज हुए थे शिकार
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मेडिकल अस्पताल के मनोरोग विभाग में 3 मरीजों के पैरों को काट लिया था। इसके पहले चूहों ने अस्पताल के वार्ड बॉय व एक नर्स को भी काटकर अपना शिकार बताया था। घटना इसलिए भी गंभीर हो गई थी क्योंकि इंदौर में एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो मासूम बच्चों की मौत भी हो चुकी है इसलिए चूहों के काटने की घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है।
चूहाकांड के मामले की जांच करने मेडिकल अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा द्वारा तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी जिसमें मेडिकल के अस्थि रोग विभाग के प्राध्यापक डॉ. अशेक विद्यार्थी, सहायक अधीक्षक डॉ. राकेश सिंह गढ़वाल और कार्यवाहक मेट्रन श्रीमति मनीषा लाल को शामिल किया गया है। अभी जांच टीम की रिपोर्ट आने में एक दो दिन का समय और लगना बताया जा रहा है लेकिन अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदारों ने लापरवाही कर्मचारियों को हटाकर सख्त संदेश दे दिया है।
