
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास पर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण से जुड़ी कानूनी अड़चनों और उसके समाधान को लेकर एक महत्त्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जितू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कमलेश्वर पटेल, आयोग के अध्यक्ष सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक के बाद पटवारी ने कहा, “मुख्यमंत्री ने सभी दलों को बुलाकर ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कानूनी समस्याओं पर चर्चा की। सर्वसम्मति से यह तय हुआ कि आरक्षण लागू किया जाना चाहिए और जिन लोगों ने इसे छह वर्षों तक रोके रखा, उनके खिलाफ कार्रवाई हो। यदि इसे शीघ्र लागू करने का रास्ता निकलता है तो यह सकारात्मक कदम होगा।”
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, “देर आए दुरुस्त आए, शायद गणेश जी ने इन्हें सद्बुद्धि दी। हम लगातार 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की मांग कर रहे हैं। हमारी सरकार में इसे विधानसभा से पारित किया गया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। अब यह तय हुआ कि सभी दलों के अधिवक्ता मिलकर एक रिपोर्ट तैयार करेंगे और कोर्ट में डे-टू-डे सुनवाई में प्रस्तुत करेंगे। अदालत ने कभी रोक नहीं लगाई, सरकार ने ही इसे रोके रखा।”
कांग्रेस ने बैठक में चार प्रमुख मांगें रखीं—कानूनी अड़चनों का शीघ्र निराकरण, जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई, राजनीतिक सहमति से आगे बढ़ना और ओबीसी युवाओं के भविष्य की सुरक्षा। पार्टी ने दोहराया कि आरक्षण सामाजिक न्याय और समान अवसर की गारंटी है और इसके क्रियान्वयन में अब और देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
