सुसनेर: सामूहिक प्रयासों से किसी भी परिस्थिति को बदला जा सकता है. इसकी मिसाल श्यामपुरा का शासकीय पीएम श्री विद्यालय है. जहां के हर बच्चे का पालक उसके माता-पिता के अलावा उसकी क्लास का शिक्षक भी है. जो बच्चों के शैक्षणिक स्तर से लेकर उसकी दिनचर्या बनाने के साथ ही मॉनिटरिंंग भी करते हैं. इस स्कूल की 10वीं और 12वीं क्लास के 10 से 15 बच्चों के एक ग्रुप का पालक शिक्षक को बनाया गया है.
इस स्कूल में इस तरह के नवाचारों के चलते शत-प्रतिशत रिजल्ट निकलता है. राजस्थान सीमा से जुड़े और पिछड़े क्षेत्र में होने के बाद भी इस स्कूल में प्रवेश के लिए बच्चे लालायित रहते हैं. सुसनेर से करीब 13 किमी दूर स्थित गांव श्यामपुरा के इस विद्यालय में कोई भी अवकाश का दिन हो या कोई त्यौहार हो या रविवार हो, कोई फर्क नहीं पड़ता, स्कूल चलता रहता है. स्कूल के प्राचार्य जितेन्द्र शर्मा कहते हैं हमने अपने स्कूल को एक मॉडल के तौर पर स्थापित करने का लक्ष्य हाथ में लिया था.
परिणाम भी उम्मीद के मुताबिक रहे. इसके चलते सभी के प्रयासों से हायर सेकंडरी स्कूल का पीएम श्री के लिए गत शिक्षण सत्र में चयन हुआ और आज इसी नाम से आधुनिक सुविधाओं के साथ स्कूल का संचालन हो रहा है. प्राचार्य ने बताया सभी शिक्षकों का पूरा ध्यान हर समय बच्चों पर रहता है. उनके बीच सकारात्मक सोच पैदा करने की कोशिश की जाती है. टीचर उनकी दिनचर्या तय करते हैं और उसी अनुरूप मॉनिटरिंग की जाती है.
बच्चों के अनुपस्थित रहने पर स्टाफ घर-घर करता है संपर्क
लगातार बच्चों के अनुपस्थित होने पर स्कूल के स्टाफ द्वार घर-घर जाकर बच्चों के अभिभावकों से सम्पर्क किया जाता है. और स्कूल में बच्चों की शतप्रतिशत उपस्थित बनी रहे इसके प्रयास किए जाते हैं. साथ ही बच्चों की पढाई के स्तर से भी अभिभावकों को अवगत कराया जाता है. इसके लिए पेरेन्ट्स मीटींग का भी आयोजन स्कूल में किया जाता है.
शिक्षक ही करते हैं बच्चों की मॉनिटरिंग
हर विद्यार्थी के घर पर क्लास टीचर का सीधा संपर्क है, बच्चों के जागने और सोने के समय तक की मॉनिटरिंग की जाती है. बच्चों की ग्रेडिंग के आधार पर उनकी पढ़ाई के घंटे तय हैं, नवंबर तक स्कूल का कोर्स पूरा करा लिया जाता है. इसके बाद रिविजन शुरू होता है. साथ ही बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए साप्ताहिक टेस्ट भी लिए जाते है.
इनका कहना है
श्यामपुरा के पीएम श्री स्कूल में सामूहिक प्रयासों से शत प्रतिशत रिजल्ट निकलता है. 10 से 15 बच्चों का ग्रुप बनाकर के एक शिक्षक को उनका पालक बनाना बच्चों की दिनचर्या की मानिटरिंग करना, संडे के दिन भी बच्चों की पढाई करवाना जैसे कई नवाचार इस स्कूल में हो रहे है. नवाचारों की सफलता को ध्यान में रखते हुए इसे अन्य स्कूलों में लागू करने पर विचार किया जा रहा है.
मुकेश तिवारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सुसनेर
