इंदौर:पिछले कई वर्षों से यह सुनते आए हैं कि विकास में हम आगे हैं और सारी व्यवस्थाएं की जा चुकी है. लेकिन हर वर्ष बरसात होते ही शहर जलमग्न हो जाता है और नगर निगम की सारी पोल खुलकर आज जनता के सामने आ जाती है.इस वर्ष प्रदेश भर के कई हिस्सों में भारी बरसात हो रही थी वही इंदौर पूरी तरहा सूखा दिखाई दे रहा था लेकिन शुक्रवार की रात से ही शहर में झमाझम बरसात से सभी के चहरे खिल उठे लेकिन दूसरी तरफ आफतों ने घेर लिया.
शानिवार तक हुई बरसात ने शहर भी को डुबो के रख दिया. जहां नगर निगम के आला अधिकारी और क्षेत्रीय पार्षद अपनी योजनाओं में एक बार फिर विफल होते दिखाई दिए. जबकि तकरीबन एक हज़ार पांच सौ करोड़ का निकासी विकास किया गया फिर भी एक घंटे की बरसात में सड़कें तालाब बन जाती है. पानी की निकासी नहीं होने के कारण यह पानी बस्तियों और मोहल्लों में घुस जाता है.
अब तो नौबत यह देखने को मिल रही है कि कॉलोनियों में भी सड़कें पानी में डूब रही है. जहां बरसात ने नगर निगम की पोल खोल कर रख दी वहीं विद्युत विभाग के प्रबंधन की भी ध्वस्त हो गई. कई जगह पेड़ों की बड़ी शाखाएं तारों पर गिरी तो कही विद्युत डीपी में फॉल्ट होने से कई क्षेत्रों में घंटे बिजली गुल रही. बड़े दावों के बावजूद चौबीस घंटे आम जनता कई समस्याओं से जूझ रही थी. इन अव्यवस्थाओं पर आम जनता सवाल खड़े कर रही है.
इनका कहना है
योजना सटीक होनी चाहिए. साथ ही दो-चार वर्ष आगे की सोच भी ज़रूरी है. तब जाकर शहर की समस्याओं का निराकरण हो पाएगा. वरना हर वर्ष बड़ी योजनाएं बनेगी और आम जनता परेशान होती रहेगी.
– राजेश शर्मा
कहीं वाहन पानी में फंसे, कहीं पानी घरों में भर गया. हम उन्नति की ओर है तो इस व्यवस्था में नगर निगम के इंजीनियर चूक क्यों कर जाते है. गलतियों में सुधार की ज़रूरत है.
– इमरान खान
करोड़ों खर्च हुए हंै. नाला टेपिंग, सीवरेज कार्य हाने के बाजूद फिर यहां समस्या होनी ही नहीं चाहिए. बरसात में चेंबर ओवर फ्लो होकर सड़कों पर बहता है. आखिर गलती कौन कर रहा है.
– सुनेंद्र सिंह चौधरी
