सीहोर. गुरु कभी किसी का बुरा नहीं चाहता हैं. गुरु का अनुशासन सदैव हितकारी होता है। गुरु का अनुशासन जीवन में रहे तो उसे चमकदार बना देता है. गुरु जो कहे, वह धारण, पालन और अनुसरण करें.अगर विश्वास और आस्था के साथ गुरु के एक शब्द का भी संबंध में आपके दिल और दिमाग से हो गया तो आपका जीवन सफल हो सकता है.
उक्त विचार कुबेरेश्वरधाम पर जारी श्री शिव महापुराण के तीसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे. उन्होंने कहा कि एक स्त्री का सबसे बड़ा गुरु उसका पति रहता है, जो उसकी रक्षा भी करता है और सही उपदेश भी देता है. स्त्री को अपने पति के मार्गदर्शन में चलने की बात कही है. पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि गुरु के आसन का नहीं, गुरु के अनुशासन का अनुसरण करना चाहिए. इसका मतलब है कि हमें गुरु के उपदेशों को सुनना चाहिए. उनका पालन करना चाहिए और अपने जीवन में अनुशासन बनाए रखना चाहिए. गुरु का अनुशासन, या गुरु के मार्गदर्शन में अनुशासन, एक शिष्य के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है. गुरु एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं, जो शिष्यों को सही रास्ते पर चलने और जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करते हैं. गुरु के पद का स मान करने के बजाय, हमें उनके द्वारा सिखाए गए अनुशासन का पालन करना चाहिए. गुरु का पद तो स मान का पात्र है, लेकिन असली महत्व शिष्य के जीवन में अनुशासन का है.
