NEET UG 2025: सरकारी MBBS सीट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा, 20 से ज्यादा दावेदार एक सीट के लिए प्रयासरत

नीट यूजी 2025 में 12 लाख से अधिक छात्रों ने किया क्वालीफाई, पर सरकारी सीटों की संख्या सीमित; कटऑफ बढ़ने की संभावना, काउंसलिंग प्रक्रिया होगी बेहद अहम।

कोटा , 24 जून (नवभारत): मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2025 के परिणाम घोषित होने के साथ ही देश भर में मेडिकल सीटों के लिए जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। इस वर्ष 12.36 लाख से अधिक छात्रों ने NEET UG 2025 क्वालीफाई किया है, लेकिन सरकारी MBBS सीटों की संख्या बेहद सीमित है, जिससे एक सरकारी सीट के लिए 20 से भी अधिक दावेदार मैदान में हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देखने वाले छात्रों को सरकारी कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए कितनी कड़ी मेहनत और उच्च अंक हासिल करने होंगे।

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अनुसार, 2025-26 के लिए भारत के 780 मेडिकल कॉलेजों (सरकारी और निजी दोनों) में कुल 1,18,190 MBBS सीटें उपलब्ध हैं। इनमें से, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 55,000 से 56,000 सीटें हैं। यानी, क्वालीफाई करने वाले छात्रों की संख्या और उपलब्ध सरकारी सीटों के बीच एक बड़ा अंतर है। यह अंतर हर साल बढ़ रहा है, क्योंकि NEET में बैठने वाले छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि सीटों में वृद्धि उस अनुपात में नहीं हो रही है। इस साल, सामान्य श्रेणी के लिए कटऑफ स्कोर 686-144 के बीच है, जबकि ओबीसी, एससी और एसटी के लिए यह 143-113 के बीच है। हालांकि, सरकारी एमबीबीएस सीटों के लिए कटऑफ काफी ऊपर जाता है।

काउंसलिंग प्रक्रिया होगी निर्णायक, छात्रों के सामने निजी कॉलेजों और विदेश का विकल्प

इस साल की काउंसलिंग प्रक्रिया उन छात्रों के लिए बेहद निर्णायक होगी जो सरकारी एमबीबीएस सीट पाने की उम्मीद कर रहे हैं। 15% अखिल भारतीय कोटा (AIQ) और 85% राज्य-स्तरीय कोटे के माध्यम से सीटों का आवंटन किया जाएगा। छात्रों को अपने स्कोर और वरीयता के आधार पर कॉलेजों का चयन करना होगा, जिसमें एक छोटी सी गलती भी उनके प्रवेश के अवसरों को प्रभावित कर सकती है।

इस कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए, कई क्वालीफाई करने वाले छात्रों के लिए निजी मेडिकल कॉलेज या विदेश में मेडिकल की पढ़ाई एक विकल्प बन सकता है। निजी कॉलेजों की फीस काफी अधिक होती है, जबकि विदेश में पढ़ाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुसार NEET-UG क्वालीफाई करना अनिवार्य है। ऐसे में, सरकारी सीट हासिल करना उन छात्रों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, जो गुणवत्तापूर्ण और सस्ती चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।

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