
गुना। शहरवासियों को शुक्रवार दोपहर भीषण गर्मी और उमस से राहत तो मिली, लेकिन यह राहत कुछ हद तक परेशानी बनकर भी आई। गुना शहर में सीजन की पहली तेज बारिश ने जहां लोगों को राहत दी, वहीं नगरपालिका की सफाई व्यवस्था की भी पोल खोल दी। दोपहर करीब 3 बजे अचानक मौसम बदला और तेज हवा के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई, जो करीब आधे घंटे से ज्यादा देर तक लगातार चलती रही। तेज बारिश और हवा-आंधी के कारण शहर की कई सडक़ों पर पेड़ गिर गए। विभिन्न चौराहों और प्रमुख बाजारों में लगे बड़े-बड़े पोस्टर व बैनर तेज हवा में उडक़र फट गए या उखडक़र गिर गए। शहर के कई इलाकों में बिजली की कडक़ड़ाहट के साथ तेज गरज सुनाई दी, जिससे कुछ समय के लिए दहशत का माहौल भी बना। इस दौरान मंदिर घाट के पास जाट मोहल्ला में वर्षों पुराना पीपल का पेड़ गिर गया। जिसके बाद पूरे मोहल्ले की बिजली गुल हो गई।वहीं विकास नगर, कुशमौदा में कच्चे घरों के टीनशेड्स उड़ गए। इस दौरान यहां भी बिजली गुल रही। जबकि प्रधान डाकघर के पास एक नीम के पेड़ का कुछ हिस्सा रोड पर गिर गया।
बारिश के चलते शहर की प्रमुख सडक़ों पर कुछ ही मिनटों में जलभराव की स्थिति बन गई। खासकर नालियों की सफाई न होने की वजह से गंदा पानी उफनकर सडक़ों पर बहने लगा। अस्पताल चौराहा, हनुमान चौराहा, पुरानी गल्ला मंडी, कर्नलगंज कॉलोनी, और श्रीराम कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में सडक़ें पानी में डूब गईं, जिससे आवागमन में दिक्कतें आईं। गौरतलब है कि बारिश से पहले दोपहर में तापमान लगभग 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। उमस और लू ने लोगों को बुरी तरह परेशान कर रखा था। कूलर और पंखों के साथ-साथ एसी तक बेअसर साबित हो रहे थे। ऐसे में जब तेज बारिश हुई, तो लोगों को गर्मी से तो राहत मिली, लेकिन नगर पालिका की लापरवाही भी उजागर हो गई। शहरवासियों ने मांग की है कि मानसून के पूर्व ही नालियों और नालों की समुचित सफाई की जाए, ताकि जलभराव और गंदगी से निजात मिल सके। यदि समय रहते यह कार्य नहीं हुआ, तो आगामी दिनों में होने वाली बारिश शहर के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। जानकारी के अनुसार जिले में तेज आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई। करोड़ों की लागत से बनी नवीन कलेक्ट्रेट बिल्डिंग में नीचे से ऊपर तक पानी भर गया। ग्रामीण अंचलों में कई कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए, खप्पर, चद्दर व कवेलू उड़ गए और घरों में पानी भर गया।
