सीधी जिले के तीन गांव सुकवारी, बघवारी और छिरौंही में शुरू हुआ तांबा भण्डार का सर्वे

सीधी। सीधी जिले के तीन गांव सुकवारी, बघवारी और छिरौंही में तांबा भण्डार का सर्वे शुरू हुआ। 324 हेक्टेयर में तांबे की तीन ब्लॉकों का सेंशन मिला है। तांबे का अकूत भण्डार सर्वे में मिला तो सीधी के विकास की तस्वीर बदल सकती है। जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित सुकवारी, बघवारी, छिरौंही, खिरखोरी में तांबा का भंडार मिलने के बाद सर्वे का कार्य भी काफी तेजी के साथ शुरू हो चुका है। भू-वैज्ञानिकों की देख-रेख में यहां भूमि के अंदर ड्रिलिंग कर यह जानकारी एकत्र की जा रही है कि यहां तांबे की कितनी मात्रा मौजूद है। चर्चा के दौरान सर्वे में लगी टीम का कहना था कि 324 हेक्टेयर क्षेत्र में तांबे की तीन ब्लॉकों का सेंशन सरकार से मिला है। इसके बाद यहां तांबा की मौजूदगी कितनी है इसको लेकर सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि तांबा यहां कि कितनी भूमि में मौजूद है। तांबा की मात्रा जमीन में कितने नीचे तक उपलब्ध है। तांबा की खदान शुरू करने पर यहां से कितना मुनाफा हो सकता है इसकी जानकारी एकत्र की जा रही है। सर्वे टीम द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में ड्रिलिंग कर यह जानकारी जुटाई जा रही है कि भूमि की कितनी गहराई में तांबा की मौजूदगी है और उसकी मात्रा कितनी है। तांबा की कीमत काफी ज्यादा होने और उसकी उपयोगिता कई कार्यों में काफी आवश्यक होने के कारण मांग काफी ज्यादा है। इसी वजह से सरकार द्वारा इस क्षेत्र में तांबा की मौजूदगी के संबंध में पूरा विवरण जुटाया जा रहा है।

वहीं जानकारों का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में खदान शुरू करने का निर्णय तभी लिया जाता है जब वहां खर्च से ज्यादा आमदनी हो। यदि सर्वे के दौरान तांबा बहुलता में इन क्षेत्रों में मौजूद है तो यहां निश्चित ही आने वाले समय में तांबा की खदानें शुरू हो सकती हैं। खदान शुरू करने के लिए सरकार द्वारा निजी क्षेत्र के साथ भी अनुबंध किया जा सकता है। बहरहाल तांबा की मौजूदगी की खबर फैलते ही उक्त क्षेत्रों के भूमि स्वामियों में काफी खुशी की लहर देखी जा रही है। इसके साथ ही आसपास के लोगों द्वारा खाली पड़ी शासकीय भूमि में भी कब्जा करने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। वहीं कुछ लोग तो तांबा भंडार की जानकारी मिलते ही इन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-फरोख्त के लिए भी अपनी सक्रियता तेज किए हुए हैं। इन क्षेत्रों में तांबा खदान को लेकर सर्वे रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्यवाही तय होगी। इसी वजह से अभी केवल तांबा खदान के लिए सर्वे कार्य ही अधिकारी मान रहे हैं।

सर्वे से तांबा खदान की होगी राह प्रशस्त

जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर तहसील गोपद बनास के सुकवारी, बघवारी, छिरौंहीं, खिरखोरी तक तांबा की मौजूदगी का पता चलने के बाद शासन के आदेश पर टीमों द्वारा मौके पर मशीनों के माध्यम से सर्वे का काम किया जा रहा है। तांबा खदान के सर्वे के दौरान तांबे के भण्डारण की खोज और मूल्यांकन के साथ ही भू-वैज्ञानिक जांच, नमूनाकरण और भू-वैज्ञानिक मानचित्र शामिल होता है। यह प्रक्रिया तांबा खदानों की क्षमता, वितरण और विशेषताओं पर पता करने में मदद करती है। तांबा खदान सर्वे के दौरान भू-वैज्ञानिक काफी बारीकी के साथ तांबा के संभावित भण्डार क्षेत्रों की जांच करते हैं। वहीं विभिन्न भू-वैज्ञानिक संरचनाऔं और भू-वैज्ञानिक मानचित्रों का विश्लेषण करते हैं। इसके बाद वे तांबा अयस्क की सान्द्रता का पता लगाने के लिए नमूने लेते हैं और खदानों की क्षमता और गुणवत्ता का मूल्यांकन करते हैं। सर्वे के दौरान यदि यह जानकारी सामने आती है कि यहां के खदानों में तांबा की प्रचुर मात्रा उपलब्ध है। उसकी गुणवत्ता काफी अच्छी है। यहां खदान का संचालन करना घाटे का सौदा नहीं है तो आगामी दिनों में सरकार द्वारा यहां तांबा खदानों का संचालन शुरू कराने के लिए सभी आवश्यक पहल शुरू करेगी। सर्वे पर ही यहां के तांबा खदानों का भविष्य टिका हुआ है।

इनका कहना है

ग्राम बघवारी, सुकवारी, छिरौंही, खिरखोरी के 324 हेक्टेयर में तांबे की तीन ब्लॉकों के सेंशन मिले हैं। सर्वे एवं सीमांकन कार्य किया गया है। उक्त क्षेत्रों में सर्वे टीमों द्वारा आकर सर्वे का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार आगे शासन द्वारा निर्णय लिया जाएगा।

स्वरोचिष सोमवंशी, कलेक्टर सीधी

बघवारी, सुकवारी, छिरौंही, खिरखोरी क्षेत्र में सर्वे का कार्य हो चुका है। यहां सर्वे में यह पता किया जा रहा है कि कितनी मात्रा में तांबा का भंडार मौजूद है। यहां मौजूद तांबा की गुणवत्ता क्या है यह जानकारी सामने आने के बाद शासन द्वारा आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जावेगी।

शिशिर यादव, प्रभारी खनिज अधिकारी सीधी

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