ढाका, 01 मई (वार्ता) बंगलादेश में इस्लामी दलों के गठबंधन ने महिला मामलों के सुधार आयोग को समाप्त करने की मांग की है, जिससे देश में महिलाओं के अधिकारों को लेकर नयी चिंताएं पैदा हो गई हैं।
‘ बिजनेस स्टैंडर्ड बीडी’ की रिपोर्ट के अनुसार, ‘जातिया ओलमा मशायेख अम्मा’ के बैनर तले एकजुट हुए गठबंधन ने आयोग की सिफारिशों को भी खारिज कर दिया है और धार्मिक, शिक्षित और सामाजिक रूप से जागरूक महिलाओं को शामिल करते हुए एक नए आयोग की मांग की है।
धार्मिक कट्टरपंथियों ने बुधवार को ढाका में डिप्लोमा इंजीनियर्स संस्थान में आयोजित ‘महिला सुधार आयोग का इस्लामोफोबिया और हमारी जिम्मेदारियाँ’ नामक राष्ट्रीय संगोष्ठी में यह आह्वान किया। कार्यक्रम का आयोजन ‘उलामा मशायेख आइम्मा परिषद’ ने किया था। वक्ताओं ने कहा कि आयोग की कई सिफारिशें पश्चिमी विचारधाराओं से प्रेरित हैं और बंगलादेश की सामाजिक वास्तविकताओं, संस्कृति, मूल्यों और देश की महिलाओं की वास्तविक जरूरतों और संघर्षों का खंडन करती हैं।
बंगलादेश जमात-ए-इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान ने कहा, “हम इस आयोग को पूरी तरह से खारिज करते हैं क्योंकि यह अल्लाह के मूल्यों और कानूनों और राष्ट्र के विचारों और विश्वासों के खिलाफ है। आयोग को खारिज करने का मतलब है इसकी रिपोर्ट को भी खारिज करना। हम आंदोलन नहीं चाहते हैं, लेकिन अगर मजबूर किया गया तो हम सड़कों पर उतरने से नहीं हिचकिचाएंगे।”
आयोग के दृष्टिकोण में विरोधाभासों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “एक तरफ वे समान अधिकारों की बात करते हैं और दूसरी तरफ वे हर जगह महिलाओं के लिए कोटा की मांग करते हैं। अगर अधिकार समान हैं, तो कोटा की क्या जरूरत है? महिलाओं को योग्यता के आधार पर पद मिलना चाहिए, आरक्षण के आधार पर नहीं।”
ढाका ट्रिब्यून ने रिपोर्ट के अनुसार खिलाफत मजलिश के महासचिव ममनुनुल हक ने कहा, “इस्लाम महिलाओं को उचित अधिकार देता है – समान अधिकार नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण अधिकार। समान अधिकार महिलाओं को पुरुषों के साथ प्रतिस्पर्धा में धकेल देंगे, जो उनके लिए नुकसानदेह होगा।”

