एसपी ऑफिस में प्रदर्शन: कांग्रेस अध्यक्ष समेत 46 नामजद कांग्रेसियों पर प्रकरण दर्ज 

जबलपुर। कांग्रेस अध्यक्ष जितेन्द्र पटवारी उर्फ जीतू के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में कांग्रेस ने एसपी ऑफिस का घेराव कर प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प भी हुई। इस मामले में पुलिस ने कांग्रेस नगर अध्यक्ष समेत 46 नामजद कांग्रेसियों पर प्रकरण दर्ज किया हैं।

पुलिस के मुताबिक कांग्रेस नगर अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा अपने साथियों के साथ ज्ञापन देने पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर के अंदर भवन के मुख्य द्वार पर बिना अनुमति के उपस्थित होकर आक्रोशात्मक रवैया अपनाते हुये शोर शराबा कर प्रवेश द्वार पर धरना पर बैठ गए, रास्ता बाधित किया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आये हुए आवेदकों, कर्मचारियों को परेशानी हुई‌ उप पुलिस अधीक्षक के द्वारा ज्ञापन लेने के संबंध में अनावेदकगण सदस्यो को अवगत किया लेकिन उनके द्वारा ज्ञापन देने से मना कर नारेबाजी की गई। शासकीय कार्य में व्यवधान पैदा करने के साथ जिला दण्डाधिकारी के आदेश का भी उल्लंघन किया गया।

इन्हें बनाया गया आरोपी

पुलिस ने सौरभ नटी शर्मा, प्रवेंद्र सिंह चौहान, कमलेश यादव, पंकज निगम, नीरज जैन, पीयूष सेन, सुशील कुमार, बलवीर पाल, टीकाराम कोष्ठा, अमरीश मिश्रा, विष्णु विनोदिया, महेश मिश्रा, संतोष दुबे, मो. मकसूद, राजेंद्र सराफ, निलेश जैन, कपिल मिश्रा, उमेश यादव, सुरेंद्र तिवारी, सौरभ गौतम, झूल्लेलाल जैन, राजकुमार सोनी, सौरभ अग्रवाल, सुबोध पहारिया, वकील अहमद अंसारी, याकूब अंसारी, मोहनलाल, आयुष पहारिया, भारत पटेल, सुनील विश्वकर्मा, आशुतोष ठाकुर, सत्येंद्र पचौरी, श्रीमती अनूपा शर्मा, प्रीति सिंह, ईंदु सोनकर, खुर्शीद अंसारी, देवकी पटेल,. भावना निगम भगत, रितेश तिवारी, जगदीश कश्यप, सतीश तिवारी, जय ठाकुर, मदन लारिया एवं अन्य सदस्य चिंटू चौकसे, दिनेश यादव, आलोक मिश्रा व अन्य को आरोपी बनाया गया हैं।

भाजपा सरकार ने लोकतंत्र का गला घोंटा: नाटी

शहर (जिला) कांग्रेस कमेटी, जबलपुर के अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा ने बताया कि भाजपा सरकार का अलोकतांत्रिक और दमनकारी चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया, जब जबलपुर में शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन देने पहुँचे कांग्रेसजनों के साथ पुलिस प्रशासन ने असंवैधानिक, अपमानजनक और तानाशाहीपूर्ण व्यवहार किया। एसपी ने मिलने से साफ इनकार कर दिया था, जबकि वे कार्यालय में ही मौजूद थे। ये लोकतांत्रिक मर्यादाओं का घोर अपमान भी है। यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश की पुलिस अब कानून-व्यवस्था की रक्षक नहीं, बल्कि भाजपा की निजी सेना बन चुकी है, जो लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का हथियार बन चुकी है। जब कांग्रेस कार्यकर्ता “रघुपति राघव राजा राम” जैसे भजन गाकर शांतिपूर्ण ढंग से धरने पर बैठे, तो भाजपा सरकार की बौखलाहट इतनी बढ़ गई कि पुलिस ने बलपूर्वक सभी को गिरफ़्तार कर सिविल लाइन थाने भेज दिया। उन पर झूठे प्रकरण दर्ज किए गए, जो लोकतंत्र के खिलाफ सीधा हमला है। भाजपा सरकार अब पुलिस की आड़ लेकर लोकतंत्र की हत्या कर रही है। मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि अगर प्रशासन जनता की नहीं, सत्ता की भाषा बोलेगा तो कांग्रेस उसे सड़कों पर बेनकाब करेगी। यह लड़ाई अब आर-पार की होगी।” यह पूरी घटना इस बात का प्रमाण है कि भाजपा लोकतांत्रिक विरोध से डरती है और पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज़ को कुचलना चाहती है।

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