अहमदाबाद, 01 जून (वार्ता) अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने टेस्ट मैचों पर खराब रोशनी के असर को कम करने के प्रयास के तहत लाल की जगह गुलाबी गेंद के इस्तेमाल के ट्रायल को मंजूरी दे दी है। यह बदलाव दोनों टीमों की पहले से बनी सहमति पर निर्भर करेगा।
यह फैसला चीफ एग्जीक्यूटिव कमेटी की कई सिफारिशों में से एक था, जिसे रविवार को अहमदाबाद में हुई एक बैठक में आईसीसी बोर्ड ने मंजूरी दी। अब तक गुलाबी गेंदों का इस्तेमाल केवल दिन-रात्रि टेस्ट मैचों में होता था, जो अधिकतर ऑस्ट्रेलिया में खेले जाते हैं और कहीं और नहीं। लेकिन, दिन में खेले जाने वाले टेस्ट मैच के दौरान लाल गेंद की जगह गुलाबी गेंद का इस्तेमाल करने का यह ट्रायल इसलिए किया जा रहा है ताकि रोशनी कम होने पर भी खेल जारी रह सके और खराब रोशनी की वजह से बर्बाद होने वाले समय और ओवरों को कम से कम किया जा सके।
ऐसा माना जा रहा है कि खेल के नियमों में यह बदलाव चार जून से इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच शुरू होने वाली सीरीज तक लागू नहीं हो पाएगा। आईसीसी ने यह भी कहा कि वह “मैच अधिकारियों और स्टेडियमों के लिए लाइटिंग टेक्नोलॉजी पर रिसर्च करेगा, ताकि खराब रोशनी की वजह से खेल में होने वाली रुकावटों को कम किया जा सके। इस रिसर्च और डेवलपमेंट (आर एंड डी) प्रोजेक्ट में आईसीसी, मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के साथ मिलकर फंड देगा।”
इसके अलावा बैठक में एक और सिफारिश को मंजूरी दी है। इसके तहत, एकदिवसीय और टी-20 मैचों में मुख्य कोच – या उनके द्वारा नियुक्त स्टाफ़ – तय ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान मैदान में जाकर अपने खिलाड़ियों से बात कर सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक इसकी इजाज़त नहीं थी – संदेश सिर्फ़ ड्रिंक्स लेकर मैदान में आने वाले खिलाड़ियों के ज़रिए ही भेजे जा सकते थे – लेकिन आईपीएल जैसी फ़्रैंचाइजी टी-20 लीग में यह नियम पहले से ही लागू है, जहाँ कोच ‘स्ट्रेटेजिक टाइमआउट’ के दौरान अपने खिलाड़ियों से बातचीत करते हैं। अब टी-20 मैचों के लिए दोनों पारियों के बीच 15 मिनट का ब्रेक होगा, और बल्लेबाज़ों को खेल दोबारा शुरू होने पर तैयार रहना होगा।
2025 में, आईसीस ने ‘वाइड’ गेंदों के फ़ैसले के मामले में गेंदबाजो को ‘लेग साइड’ की ओर थोड़ी ज़्यादा छूट देने के लिए ट्रायल शुरू किए थे। अब आईसीसी ने इस नियम को हमेशा के लिए लागू करने का फ़ैसला किया है। इसके तहत, अंपायरों को लेग साइड की तरफ़ पड़ने वाली वाइड गेंदों का सही फ़ैसला लेने में मदद करने के लिए मैदान पर ‘गाइड लाइन्स’ बनाई जाएंगी। यह नियम तब और भी ज़्यादा मददगार साबित होगा, जब कोई बल्लेबाज़ अपनी क्रीज़ पर इधर-उधर घूम रहा हो।
इसके अलावा, अगर किसी गेंदबाज के गेंद फेंकने के तरीके पर शक होता है, तो आईसीसी ने कहा है कि वह मैच अधिकारियों को ‘हॉक-आई’ डेटा उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इस डेटा की मदद से अधिकारी यह तय कर पाएंगे कि उन्हें किसी गेंदबाज के खिलाफ रिपोर्ट करनी है या नहीं।
