
18 जुलाई 2012 को हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना ने दुनिया को अलविदा कह दिया। लंबे समय से कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे राजेश खन्ना ने अपने अंतिम क्षणों में कथित तौर पर कहा, “टाइम हो गया है, पैकअप।” यह संवाद आज भी उनके प्रशंसकों की स्मृतियों में अमर है।
मौत से कुछ दिन पहले भी राजेश खन्ना कैमरे से दूर नहीं रहना चाहते थे। गंभीर बीमारी के बावजूद उन्होंने आर. बाल्कि के एक विज्ञापन की शूटिंग पूरी की और अपने फैंस के लिए भावुक संदेश दिया। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भी उनकी सबसे बड़ी इच्छा अपने घर “आशीर्वाद” लौटने की थी। 17 जुलाई को उन्हें घर लाया गया और अगले ही दिन उन्होंने अंतिम सांस ली।
19 जुलाई को मुंबई में उनका अंतिम संस्कार हुआ, जहां लाखों प्रशंसक उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। भारी बारिश के बावजूद सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। परिवार के साथ बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां भी अंतिम दर्शन के लिए मौजूद रहीं।
राजेश खन्ना का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में जन्मे जतिन खन्ना को बचपन में रिश्तेदारों ने गोद लिया। थिएटर से अभिनय की शुरुआत करने वाले जतिन ने फिल्मफेयर टैलेंट कॉन्टेस्ट जीतने के बाद फिल्मों में कदम रखा और नाम बदलकर राजेश खन्ना रखा गया। 1969 की ‘आराधना’ ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद लगातार 17 सुपरहिट फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार बना दिया।
उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि प्रशंसक खून से खत लिखते थे और उनकी कार तक को चूमते थे। निधन के बाद उनके बंगले से प्रशंसकों के उपहारों से भरे 64 सूटकेस मिले, जो उनके प्रति लोगों के अथाह प्रेम की गवाही देते हैं।
आज उनकी पुण्यतिथि पर राजेश खन्ना सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के उस सुनहरे दौर की पहचान हैं, जिनका स्टारडम आज भी मिसाल माना जाता है।
