भोपाल, 17 अप्रैल (वार्ता) मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की एक अदालत द्वारा लगभग 25 साल पुराने, कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की कथित आत्महत्या मामले में पुलिस की खात्मा रिपोर्ट को नामंजूर किए जाने के फैसले के बाद ये प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
कांग्रेस की नेता रहीं सरला मिश्रा के भाई अनुराग मिश्रा ने इस बारे में कल संवाददाताओं से चर्चा के दौरान एक राजनेता को लेकर एक बार फिर अपने आरोप दोहराए।
उन्होंने कहा कि उनकी बड़ी बहना सरला मिश्रा से जुड़े 14 फरवरी 1997 के इस मामले को तत्कालीन सरकार और पुलिस अधिकारियों ने आत्महत्या बताया, जबकि वो हत्या थी। उस समय की पुलिस केस डायरी में बहुत सी विसंगतियां थीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने बार-बार पुलिस से इस बारे में बात की, लेकिन पुलिस ने उनकी बातों पर कोई संज्ञान नहीं लिया।
श्री मिश्रा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन समय में तत्कालीन मुख्यमंत्री निवास के निर्देश पर कुछ लोग घटनास्थल पर पहुंचे, पर उन्होंने ना तो अस्पताल और ना ही पुलिस से कोई संपर्क किया। उन्होंने एक राजनेता पर प्रकरण को दबाते रहने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि उनकी बहन सरला मिश्रा का उस समय कांग्रेस के कुछ नेताओं से विवाद था, जिसके कुछ ही दिन बाद उनकी बहन के साथ ये घटना हुई। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने जांच के दौरान की विसंगतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि इस मामले की जांच फिर से होनी चाहिए।
भोपाल की एक अदालत ने वर्ष 2000 के इस प्रकरण में पुलिस खात्मा रिपोर्ट को नामंजूर कर दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं।
