
पानसेमल,
होली पर्व में केवल पारंपरिक रूप धारण करने सहित अन्य विषयो पर हुई चर्चा,,,
पानसेमल तहसील के ग्राम बायगोर में आदिवासी भील समाज द्वारा समाज में पारंपरिक रीति रिवाज से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई,जिसमें समाज के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सम्मिलित हुए,भील आदिवासी समाज के तहसील अध्यक्ष बवाज्या पटेल ने बताया समाज में होली पर्व पर होने वाले आयोजन सहित मांगलिक आयोजन व गमी के आयोजन में परंपरा के नाम पर हो रही फीजूल खर्ची व लेन-देन में हो रही परेशानियों का निराकरण करने हेतु बैठक का आयोजन किया गया। इसमें गांव पटेल, वारती, पुजारा, गांव डाहला,, कारबारी, वरिष्ठ बुजुर्ग सहित ग्रामीण शामिल हुए। इसमें होली पर्व पर पारंपरिक बुदिया बावा,काली निष्क्या का रूप धारण करने सहित समाज में ली जाने वाले दहेज की राशि को तय किया गया। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए है। बैठक में हुए निर्णयों का सभी गांवों में गांव पटेल और वरिष्ठजन उसका पालन कराएंगे। अगर इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते है तो इसे पूरे जिले में लागू कर आदर्श समाज की स्थापना करने की ओर कदम उठाया जाएगा। समाज में बढ़ती दहेज की राशि के चलते समाज के गरीब वर्ग के व्यक्ति को बेटे व बेटी की शादी कराने के लिए कर्ज लेना पड़ता है। ऐसी स्थिति नहीं बने इसलिए समाज में बदलाव की सख्त जरूरत है। इस दौरान बैठक में रायसिंह पटेल, चेनसिंह ग्रेंदे, सकरिया, कागड़ा सहित अन्य समाज प्रमुख मौजूद थे।
होली पर्व पर निर्धारित रूप ही करेंगे धारण।
आदिवासी भील समाज में होली पर्व पर बावा, बुदिया, काली व निस्कया का रूप धारण करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा समाज का व्यक्ति अगर कोई अलग रूप धारण करेगा तो गांव पटेल की ओर से उस पर 1100 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। इसको लेकर सभी गांव पटेल को सूचित किया गया है। ताकि होली पर्व पर पुरानी परंपरा को नया रूप नहीं दिया जा सके।
शादी के लिए समाज ने यह लिया निर्णय
समाज अध्यक्ष बवाज्या पटेल ने बताया आदिवासी भील समाज में अब बैंड-बाजा बजाना प्रतिबंधित किया है। दहेज की राशि देना व लेना 25,025 रुपए तय किया है। इससे ज्यादा राशि नहीं ली जाएगी। शादीशुदा व्यक्ति अगर कुंवारी लड़की से दूसरी शादी करता है तो उस पर समाज की ओर से 50050 रुपए जुर्माना लेने के साथ दहेज की राशि 25025 रुपए वसूल की जागी। दो विवाह करने पर प्रतिबंध लगाया है। वहीं बच्चें नहीं होने व विधवा का विदूर होने की स्थिति में दूसरी शादी करने की सहूलियत दी गई है।
रस्मों में हो रहे खर्चे पर लगाई रोक
समाज ने बैठक मं निर्णय लिया कि समाज के मांगलिक व गमी के आयोजन में लेन-देन के नाम पर हो रहे खर्चे पर रोक लगाई जाएगी। इसके लिए मंगनी के समय शृंगार सामग्री और गहने देने पर प्रतिंबध लगाया है। वहीं विवाह में भेंट 5 साल बाद लेने का तय किया गया। विवाह या गृहप्रवेश के कार्यक्रम में कपड़े व बर्तन देने पर प्रतिबंध लगाया है। वही गर्मी होने पर कपड़े का लेनदेन सिर्फ करीबी रिश्तेदार ही करेंगे। इसके साथ समाज में सट्टा व पत्ते खेलने पर प्रतिबंध लगाया है।
गांव पटेल के समक्ष हो विवाद का िनराकरण
समाजजनों ने बैठक में कहा कि गांव में कोई भी छोटा मोटा विवाद होता है तो लोग थाने जाकर केस दर्ज कराते हैं। इसमें कोर्ट जाने में समय व पैसे दोनों की बर्बादी होती है। इसको देखते हुए गांव के झगड़ों का निराकरण गांव पटेल, पुजारी व वारती के माध्यम से गांव में ही किया जाए। ताकि समाज का कोई भी व्यक्ति परेशान नहीं हो। आपसी समझाइश से झगड़ों का निराकरण होने से समाजजनों के संबंधों में सुधार होगा।
