इंदौर:भाजपा ने शहर और जिले के अध्यक्ष घोषित कर दिए है. भले ही लंबे समय बाद रायशुमारी से नाम घोषित किए गए है, एक बार फिर दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग को दरकिनार किया है. शहर में ब्राह्मण तो ग्रामीण में ठाकुर जाति पर निर्णय किया है.भाजपा ने कल शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा घोषित कर दिए है. ऐसा बताया जा रहा है कि रायशुमारी को विशेष तौर पर निर्वाचन अधिकारी विवेक शेजवलकर और संगठन मंत्री हितानंद शर्मा ने प्राथमिकता से उपर रखा.
यही कारण है कि शहर के चार विधायक और एक सांसद के मत को तवज्जों मिली. यहीं स्थिति ग्रामीण क्षेत्र में भी रही और वहां भी विधायक और सांसद की राय को दरकिनार नहीं करते हुए प्राथमिकता दी गई. भाजपा ने कई सालों बाद रायशुमारी को तवज्जों दी है, अन्यथा उमेश शर्मा और संतोष वर्मा के समय रायशुमारी की बजाय समर्थकों को प्राथमिकता दी गई थी. दोनों नेता शहर के मंडल अध्यक्ष से लेकर विधायकों की पसंद थे, सांसद की पसंद थे, संगठन की पसंद थे, किंतु भाजपा ने ऊपर से नाम घोषित कर दिए थे। दोनों नेता सदमे में जान गवां बैठे.
भाजपा वैसे ही पिछड़ा वर्ग, दलित और अनुसूचित जाति के बात करती है, लेकिन मूल रूप से उक्त तीनों को जातिगत आधार पर दरकिनार किया है. महेंद्र हार्डिया आखरी ओबीसी के अध्यक्ष बने थे. उसके बाद आज तक भाजपा का नगर अध्यक्ष ओबीसी या एससी से नहीं बना. सुदर्शन गुप्ता, रमेश मेंदोला, शंकर लालवानी, गौरव रणदिवे और सुमित मिश्रा उच्च जाति से ही आते है. यह बात अलग है कि इस बार कम से कम रायशुमारी को तवज्जों मिली, मगर दलित, पिछड़ा वर्ग को दरकिनार किया गया.
