नयी दिल्ली/गुरुग्राम, 03 जनवरी (वार्ता) देश के आठ शीर्ष शहरों में वर्ष 2024 में कुल 8.9 करोड़ वर्ग फुट के कार्यालय क्षेत्र के किराए के सौदे हुए जो एक नया कीर्तिमान है। यह तथ्य अचल सम्पत्ति बाजार की परामर्शदाता फर्म कुशमैन एंड वेकफील्ड की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गयी।
कंपनी के अनुसार सकल पट्ट्रेदारी क्षेत्र (जीएलवी) के हिसाब से 2024 में वार्षिक आधार पर 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। यह क्षेत्र के हिसाब से 1.4 करोड़ वर्ग फुट की वृद्धि दर्शाता है।
वर्ष के दौरान किराए की सबसे ज्यादा जगह की मांग करने वाले क्षेत्रों में आईटी-बिजनेस प्रासेस मैनेजमेंट (आईटी-बीपीएम) सेवा क्षेत्र (29 प्रतिशत), बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (17 प्रतिशत), विनिर्माण एवं इंजरियरिंग (17 प्रतिशत) और फ्लेक्जिबल (काम की दृष्टि से लचीली जगहों का हिस्सा 14 प्रतिशत रहा।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगातार तीसरे वर्ष किराए के कार्यालय स्थल का बाजार तेज रहा और इससे “विश्व के कार्यालय ” के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
वर्ष 2024 में प्रमुख शहरों में किराए के कार्यालयों की कुल मांग में वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) की जगह का हिस्सा 27-29 प्रतिशत के बीच रहा। रिपोर्ट के अनुसार यह भारतीय अर्थव्यवस्था और वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए इसके महत्व को अधिक मजबूती से रेखांकित करता है।
कुशमैन एंड वेकफील्ड के भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और एपीएसी क्षेत्र के किराएदारी बाजार प्रभाग के मुख्य अधिशासी अधिकारी अंशुल जैन ने कहा, “2024 भारत के कार्यालय क्षेत्र के लिए एक निर्णायक वर्ष रहा है, जिसने रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धि हासिल की है।”
वर्ष 2024 में हुए कार्यालय स्थलों के पट्टे के सकल क्षेत्र के हिसाब से बेंगलुरु (2.59 करोड़ वर्गफुट) 29 प्रतिशत हिस्से के साथ सबसे बड़ा बाजार रहा। उसके बाद मुंबई (1.78 करोड़ वर्ग फुट) 20 प्रतिशत और दिल्ली-एनसीआर (1.31 करोड़ वर्ग फुट(15 प्रतिशत) का एमएसएफ का योगदान रहा। हैदराबाद और पुणे 14 प्रतिशत और और 10 प्रतिशत योगदान के साथ चौथे और पांचवे स्थान पर रहे।
बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद, सभी ने साल के दौरान अब तक के सबसे अधिक क्षेत्र के लिए पट्टेदारी के सौदे दर्ज किए।
इस दौरान देश के प्रमुख सम्पत्ति बाजारों में किराया स्थलों का शुद्ध अवशोषण या भराव या भरे हुए क्षेत्र का शुद्ध विस्तार पांच करोड़ वर्ग फुट रहा जो 2019 के कोविड के पहले रिकोर्ड से बेहतर रहा।
बेंगलुरु, एक बार फिर 1.42 करोड़ वर्गफुट के शुद्ध अवशोषण के साथ पहले स्थान पर रहा उसके बाद दूसरे स्थान पर मुंबई (1.09 करोड़ वर्गफुट), हैदराबाद (81.8 लाख वर्गफुट) तीसरे और दिल्ली-एनसीआर (70.6 लाख वर्ग फुट) का चौथे स्थान पर रहा।
