जबलपुर। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि बयान दर्ज करने में देरी गवाही को खारिज किये जाने का आधार नहीं है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ हत्या के अपराध में दोष सिद्धि के फैसले को बरकरार रखा है।छिंदवाड़ा जिला न्यायालय के द्वारा हत्या के आरोप में लाल चंद्र, रूप चंद्र सहित पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया था। अभियोजन के अनुसार मामला 11 जनवरी 2013 को सामने आया, जब हर्रई थाना क्षेत्र के जंगल स्थित श्मशान स्थल के पास एक व्यक्ति का अधजला शव मिला।
बाद में डीएनए जांच के माध्यम से शव की पहचान कोमल गिरी के रूप में हुई। शव को जलाकर कथित रूप से साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया। पोस्टमार्टम में शरीर पर कई चोटें मिलीं और चिकित्सकीय राय के अनुसार मृत्यु सिर तथा छाती पर लगी अनेक चोटों के कारण हुई थी। अपीलकर्ताओ की तरफ से तर्क दिया गया कि गवाहों के बयान घटना के लगभग एक सप्ताह बाद दर्ज किये गये है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि केवल बयान दर्ज होने में देरी अपने आप में गवाही को खारिज करने का आधार नहीं है, विशेषकर जब गवाहों ने देरी का स्पष्टीकरण दिया है। उनका बयान अन्य साक्ष्यों से समर्थित है। सामान की बरामदगी सहित अन्य साक्ष्य अभियोजन की कहानी से मेल खाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पहचान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य मिलकर अभियोजन के मामले को समर्थन देते हैं। एकलपीठ ने अपील को खारिज करते हुए सजा के फैसले को बरकरार रखा है।
