रियाद, 17 सितंबर (वार्ता) यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच सऊदी अरब ने अपने क्षेत्रीय और पश्चिमी सहयोगियों से आपातकालीन सैन्य मदद मांगी है।
सऊदी अरब ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह हूती हमलों से मुकाबले के लिए इजरायल से रक्षा सहायता मिलने की स्थिति में भी उसके साथ अपने संबंधों को सामान्य नहीं बनायेगा। गौरतलब है कि सऊदी अरब हवाई रक्षा प्रणालियों की कमी से जूझ रहा है।
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों और अन्य ईरान समर्थित समूहों के दागे जा रहे मिसाइलों व ड्रोनों से देश की सुरक्षा के लिए फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से तत्काल एयर-डिफेंस सहायता मांगी है। सऊदी अरब के मुख्य रक्षा सहयोगी और सबसे बड़े हथियार आपूर्तिकर्ता अमेरिका के पास भी पिछले छह महीनों से जारी ईरान संघर्ष के कारण मिसाइल इंटरसेप्टर का भंडार काफी कम हो गया है।
अपनी गंभीर सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद, सऊदी अरब ने इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया है। एक वरिष्ठ सऊदी सूत्र के अनुसार, जब तक फिलस्तीनी मुद्दे का स्थायी समाधान नहीं हो जाता और फिलस्तीनी राष्ट्र निर्माण की कोई पक्की बात सुनिश्चित नहीं होती, तब तक वह इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित नहीं करेगा।
इससे पहले, सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों पर इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का को ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। सऊदी रक्षा बलों ने इस ड्रोन को हवा में ही मार गिराया और मक्का को अपनी सुरक्षा के लिए “रेड लाइन” घोषित किया। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने मक्का पर हमले के आरोपों का खंडन किया है।
