उज्जैन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उद्योग-अनुकूल नीतियों और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रभाव अब उज्जैन जिले में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है. अंतरराष्ट्रीय बहुराष्ट्रीय कंपनियां मध्यप्रदेश, विशेषकर उज्जैन को निवेश के लिए नई पसंद के रूप में देख रही हैं. मुख्यमंत्री डॉ यादव के जिस प्रकार से 2 साल बेमिसाल हुए हैं उसमें विक्रम उद्योग पुरी का सबसे अहम रोल है.विक्रम उद्योगपुरी, देवास औद्योगिक क्षेत्र, मेडिकल डिवाइस पार्क और आगर मालवा औद्योगिक पार्क में स्थापित फैक्टि्रयों में निर्मित उत्पाद अब देश के साथ-साथ विदेशों तक निर्यात किए जा रहे हैं.
अमेरिका, कनाडा तक का निवेश
विक्रम उद्योगपुरी में अमेरिका की आरपीएसपीएल प्राइवेट लिमिटेड, पेप्सीको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड और ऑस्ट्रेलिया की प्लेग्रो टॉयज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने अपने प्लांट स्थापित किए हैं. वहीं जर्मनी की वोल्वो-आयशर कंपनी भी यहां उत्पादन कर रही है. देवास औद्योगिक क्षेत्र में जापान की सेनओह इंडिया लिमिटेड और स्पेन की रोका सेनेटरी प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट कार्यरत हैं. मेडिकल डिवाइस पार्क में अमेरिका की क्लीनिसप्लाइज प्राइवेट लिमिटेड और दक्षिण कोरिया की ई-फाइबर प्राइवेट लिमिटेड ने उत्पादन इकाइयां स्थापित की हैं. इसके अलावा आगर मालवा औद्योगिक पार्क में कनाडा की मेककेन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सक्रिय है.
प्रत्येक उत्पादों की कंपनियां खुली
इन अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा व्हिप्ड क्रीम, बेवरेजेस, खिलौने, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, सेनेटरी वेयर, मेडिकल डिवाइसेज, कैंसर डिटेक्शन किट और फ्रेंच फ्राइज जैसे उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है, जिनका निर्यात अमेरिका, यूक्रेन, रूस, कोरिया, कनाडा, सिंगापुर सहित अन्य देशों को हो रहा है. इनके साथ-साथ अमूल इंडिया, इस्कॉन बालाजी, बेस्ट लाइफस्टाइल, सन फार्मास्यूटिकल्स और आईपीसीए लैबोरेट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों के उत्पाद भी उज्जैन, देवास और रतलाम से विदेशों तक पहुंच रहे हैं.
दो साल में 16 हजार करोड़ का निवेश
पिछले दो वर्षों में जिले में लगभग 16,400 करोड़ रुपये का निवेश आया है. इससे 15,500 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और 25 हजार से अधिक को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है. जिले के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में 246 औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटित की जा चुकी है, जिनमें से 48 इकाइयों ने उत्पादन भी प्रारंभ कर दिया है.
एमओयू हुए धरातल पर उतरे प्रोजेक्ट
भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और उज्जैन में हुए रीजनल इंडस्टि्रयल कॉन्क्लेव के साथ-साथ दुबई, स्पेन, टोक्यो, जर्मनी और यूके में किए गए अंतरराष्ट्रीय रोड-शो तथा देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में हुए निवेश संवादों के सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं. ग्रोथ समिट के माध्यम से जिले में 2,593 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ी 15 औद्योगिक इकाइयों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण प्रस्तावित हैं, जिनसे 4,176 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे.
विक्रम उद्योगपुरी से खुली समृद्धि की राह
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम के अनुसार दिल्ली-मुंबई इंडस्टि्रयल कॉरिडोर के अंतर्गत ग्राम नरवर में 350 करोड़ रुपये की लागत से 773 एकड़ क्षेत्र में विकसित विक्रम उद्योगपुरी में किसानों को भूमि के बदले 450 करोड़ रुपये की राशि दी गई, वहीं 250 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज अतिरिक्त रूप से प्रदान किया गया. इस प्रकार किसानों को कुल 700 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ मिला, जिससे वे संतुष्ट हैं. यहां 109 भूखंडों में से 91 का आवंटन हो चुका है और पेप्सिको, अमूल, वोल्वो-आयशर, फेना, इस्कॉन बालाजी सहित कई प्रतिष्ठित इकाइयां उत्पादन शुरू कर चुकी हैं. बढ़ती मांग को देखते हुए विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 को 472.24 हेक्टेयर में विकसित करने की तैयारी है.
गारमेंट, मेडिकल डिवाइस और आईटी हब की ओर उज्जैन
नागझिरी और नवाखेड़ा में वस्त्र एवं परिधान उद्योग के विस्तार से उज्जैन को गारमेंट हब के रूप में पहचान मिली है, जहां 90 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं. वहीं 360 एकड़ में विकसित मेडिकल डिवाइस पार्क में 66 इकाइयों को भूमि आवंटित की गई है, जिनसे हजारों रोजगार सृजित होंगे. आईटी पार्क फेस-1 का निर्माण तेजी से जारी है और फेस-2 की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है. आने वाले वर्षों में उज्जैन के आईटी सिटी के रूप में उभरने की पूरी संभावना है.
स्थानीय रोजगार को नई गति
ताजपुर और मक्सी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में एमएसएमई इकाइयों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तेजी से बढ़े हैं. साथ ही विक्रम उद्योगपुरी और अन्य क्षेत्रों में पेप्सिको, सिंबायोटिक लाइफ साइंसेज, अलंकार स्पेशलिटी केबल्स, बॉन्ड कॉन्सेप्ट, वीई कमर्शियल व्हीकल्स सहित अनेक औद्योगिक इकाइयों के लोकार्पण और भूमिपूजन से जिले में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिली है.
