नई दिल्ली, 06 दिसंबर, 2025: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के तुरंत बाद, उन्हें एक बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। G7 देश और यूरोपीय संघ (EU) मिलकर रूस के समुद्री तेल व्यापार पर अब तक का सबसे कठोर कदम उठाने की तैयारी में हैं। इस नई रणनीति के तहत, रूसी तेल निर्यात पर लागू ‘प्राइस कैप’ व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा, और पश्चिमी टैंकरों, बीमा तथा रजिस्ट्रेशन सेवाओं के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।
यह कदम रूस की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था को सीधे निशाना बनाएगा, क्योंकि तेल उसके केंद्रीय बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा देता है। इस ‘फुल मैरीटाइम सर्विसेज बैन’ का मतलब होगा कि रूसी तेल ले जाने वाले किसी भी जहाज को पश्चिमी टैंकर, बीमा या झंडा पंजीकरण नहीं मिलेगा, भले ही तेल कहीं भी जा रहा हो। रूस का एक-तिहाई से ज्यादा तेल परिवहन अभी भी EU टैंकरों से होता है, जिस पर सीधा असर पड़ेगा।
G7–EU का उद्देश्य रूस की युद्धकालीन आय में कटौती करना है, लेकिन वैश्विक तेल बाजार को झटका दिए बिना। यदि यह प्रतिबंध लागू होता है, तो रूस को मजबूरी में अपनी ‘शैडो फ्लीट’ (पुराने, अनियंत्रित टैंकरों का वैकल्पिक बेड़ा) पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा, जो पहले ही 1,423 जहाजों तक पहुँच चुकी है। EU इसे अपने अगले (20वें) प्रतिबंध पैकेज में शामिल कर सकता है, जो 2026 की शुरुआत में लागू होगा।

