सागर। जिले के बंडा और शाहगढ़ इलाके में नकली और संदिग्ध जहरीली शराब ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक करीब 32 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रशासन ने 24 मौतों की पुष्टि की है। कई लोग इलाज के बाद ठीक हुए हैं, वहीं मामले में 14 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है – आखिर जहरीली शराब शरीर के अंदर जाकर ऐसा क्या करती है कि इंसान की जान तक चली जाती है?
नकली शराब में अगर जहरीले रसायन मिल जाएं, तो यह शरीर के लिए बेहद खतरनाक और जानलेवा हो सकती है। जानकारों के मुताबिक, मेथनॉल जैसे जहरीले रसायन शराब में मौजूद होने पर गंभीर विषाक्तता पैदा कर सकते हैं। इसका असर आंखों और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है और हालत बिगड़ने पर मौत तक हो सकती है।
हालांकि, सागर मामले में मौतों की वास्तविक वजह और शराब में किसी खास रसायन की मौजूदगी की पुष्टि फॉरेंसिक जांच के बाद ही होगी।
यानी अब सवाल सिर्फ मौतों और गिरफ्तारियों का नहीं है… सवाल उस नेटवर्क का भी है, जिसके जरिए अवैध शराब गांवों तक पहुंचती है। अवैध शराब की सप्लाई में कौन-कौन सी कड़ियां शामिल थीं? शराब कहां से आई? किसने इसे गांवों तक पहुंचाया? और सबसे अहम—इसे रोकने वाला सिस्टम समय रहते सक्रिय क्यों नहीं हुआ?
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने गांवों में दबिश बढ़ाई, अवैध शराब जब्त की और सात लाइसेंसी शराब दुकानों को सील कर सैंपलिंग कराई। प्रशासन ने घर-घर सर्वे, चौपाल और कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है।
लेकिन इस पूरे मामले में प्रशासन की जवाबदेही भी अहम है। अवैध शराब की बिक्री पर निगरानी, लाइसेंसी दुकानों की जांच, संदिग्ध शराब के सैंपल और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई—ये सभी कदम अवैध शराब के नेटवर्क को रोकने में महत्वपूर्ण हैं।
वहीं कांग्रेस ने प्रशासन पर मौतों के वास्तविक आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया है और मृतकों के विसरा की जांच स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब से कराने की मांग की है।
*अब जांच को सिर्फ यह नहीं बताना है कि कितने लोग गिरफ्तार हुए…*
बल्कि यह भी सामने लाना है कि— शराब जहरीली कैसे हुई? गांवों तक पहुंची कैसे? नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था? और इस मौत के कारोबार पर स्थायी रोक आखिर कब लगेगी?
