सागर की बेटी यामिनी ने रचा इतिहास, अब नरयावली की धरती से गूंजा संकल्प पदक केवल जीत नहीं, लाखों सपनों को उड़ान देने का संदेश

सागर:कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में जूडो में रजत पदक जीतकर देश-दुनिया के खेल पटल पर सागर, मध्यप्रदेश और नरयावली विधानसभा का नाम रोशन करने वाली सागर जिले की बेटी यामिनी मौर्य का गृह नगर आगमन पर भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। यामिनी के सागर रेलवे स्टेशन पहुंचते ही पूरा परिसर उत्साह, गर्व और अभिनंदन के भाव से भर उठा।
नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया के नेतृत्व में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति और नागरिकों ने रेलवे स्टेशन पर यामिनी मौर्य का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। अपनी बेटी की ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पहुंचे थे।

यामिनी के स्वागत के बाद रेलवे स्टेशन से भव्य वाहन रैली निकाली गई। रैली तीन बत्ती, सिविल लाइन चौराहा, मकरोनिया चौराहा होते हुए मां दुर्गा मंदिर, सदर पहुंची। मार्ग में जगह-जगह नागरिकों ने यामिनी का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। यह केवल एक खिलाड़ी के स्वागत की रैली नहीं थी, बल्कि सागर की उस बेटी के सम्मान का कारवां था, जिसने अपने संघर्ष और संकल्प से हजारों युवाओं के सपनों को नई दिशा दी है।

“यामिनी ने पदक नहीं, विश्वास जीता है” — विधायक लारिया

सदर स्थित मां दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया ने यामिनी मौर्य की उपलब्धि पर कहा कि यामिनी का रजत पदक केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन, परिश्रम और अटूट संकल्प की विजय का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि—“यामिनी ने यह साबित कर दिया है कि सपने परिस्थितियों के मोहताज नहीं होते। अगर आंखों में लक्ष्य हो, मन में विश्वास हो और कदमों में निरंतरता हो, तो साधारण घर की बेटी भी विश्व के मंच पर तिरंगा लहरा सकती है।”

विधायक लारिया ने कहा कि सफलता का शिखर अचानक नहीं मिलता। उसके पीछे वर्षों का परिश्रम, असंख्य अभ्यास, पसीना, अनुशासन, असफलताओं से लड़ने का साहस और बार-बार उठ खड़े होने का जज्बा होता है। यामिनी की यात्रा उन सभी युवाओं के लिए संदेश है, जो अपने सपनों को लेकर कभी परिस्थितियों के सामने कमजोर पड़ जाते हैं।

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा—”हार से डरना मत, क्योंकि हार रास्ते का अंत नहीं होती। हार तो यह बताती है कि मंजिल के लिए अभी एक कदम और चलना बाकी है। जिस दिन युवा अपने भीतर की ताकत पहचान लेगा, उस दिन कोई परिस्थिति उसकी उड़ान नहीं रोक पाएगी।”
“जहां से संघर्ष शुरू हुआ, वहीं आज सम्मान का तिरंगा लहरा रहा है”
विधायक श्री लारिया ने कहा कि यामिनी की सफलता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसने अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा। सदर की गलियों से निकलकर कॉमनवेल्थ गेम्स के अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। जरूरत होती है तो केवल अवसर, मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति की।
उन्होंने कहा—“आज यामिनी के हाथ में रजत पदक है, लेकिन उससे कहीं अधिक मूल्यवान वह प्रेरणा है, जो उसके संघर्ष से हजारों बेटियों और बेटों को मिली है। आज सागर की हर बेटी यह कह सकती है—अगर यामिनी कर सकती है, तो मैं भी कर सकती हूं।”
उन्होंने कहा कि यामिनी की इस उपलब्धि ने नरयावली विधानसभा को गौरवान्वित किया है और आने वाली पीढ़ी के लिए एक नई मिसाल स्थापित की है। अब आवश्यकता है कि इस उपलब्धि को केवल उत्सव तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे युवा शक्ति के संकल्प में बदला जाए।
“एक यामिनी नहीं, हजारों यामिनी तैयार करनी हैं”
विधायक लारिया ने कहा कि खेल मैदान केवल पदक जीतने की जगह नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण, अनुशासन और आत्मविश्वास की पाठशाला है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि मोबाइल की स्क्रीन से बाहर निकलकर मैदान में आएं, लक्ष्य तय करें और अपनी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाएं।
उन्होंने कहा—“हमारा लक्ष्य केवल यह नहीं होना चाहिए कि सागर को एक यामिनी मिले। हमारा संकल्प यह होना चाहिए कि सागर की धरती से ऐसी हजारों प्रतिभाएं निकलें, जो देश का तिरंगा विश्व के हर मंच पर ऊंचा करें।”
विधायक ने यामिनी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह रजत पदक उनकी यात्रा का पड़ाव है, मंजिल नहीं। आने वाले समय में यामिनी और ऊंची उड़ान भरें, देश के लिए स्वर्ण पदक जीतें और सागर की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का जीवंत उदाहरण बनें—यही हमारी शुभकामना है।
यामिनी के स्वागत में उमड़ा सागर, बेटी की सफलता पर हर चेहरा गौरवान्वित
स्वागत समारोह में उपस्थित नागरिकों के चेहरों पर गर्व और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, युवा, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में नागरिकों ने यामिनी का अभिनंदन करते हुए उनकी उपलब्धि को सागर की सामूहिक उपलब्धि बताया।
यामिनी मौर्य की यह विजय अब केवल उनके नाम के साथ दर्ज एक उपलब्धि नहीं है। यह सागर की मिट्टी के उस आत्मविश्वास की कहानी है, जो कहती है—प्रतिभा को अवसर मिले तो वह दुनिया जीत सकती है।
कॉमनवेल्थ के मंच पर जीता गया रजत पदक आज सागर लौट आया है, लेकिन अपने साथ वह एक बड़ा संदेश भी लेकर आया है—संघर्ष छोटा हो सकता है, परिस्थितियां कठिन हो सकती हैं, रास्ता लंबा हो सकता है; लेकिन संकल्प बड़ा हो तो मंजिल कभी असंभव नहीं होती।
यामिनी की जीत ने सागर की धरती पर एक नया विश्वास बोया है अब यहां से निकलने वाला हर युवा अपने सपनों को छोटा नहीं, आसमान जितना बड़ा देखेगा।
इस अवसर पर सदर मंडल अध्यक्ष सौरभ केशरवानी, प्रभुदयाल पटेल, अध्यक्ष कुश कल्याण बोर्ड, पंकज मुखारिया, श्याम सुंदर मिश्रा, गणेश केसरवानी, रामप्रसाद विश्वकर्मा, विनोद गुरु, कोच दीपक कुमार, मधु मौर्य, आशीष सिंह, राहुल प्रधान, नपा उपाध्यक्ष कर्रापुर शैलेंद्र सिंह, पार्षद प्रशांत अहिरवार, सुनील चौकसे सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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