जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में वित्तीय अनियमितता के मामले में अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने कहा कि किसी अधिकारी के अवकाश के दौरान हुए गलत भुगतान के लिए केवल संस्था प्रमुख होने के आधार पर उस पर प्रतिनिधिक दायित्व तय नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने नईगढ़ी रीवा की तत्कालीन परियोजना अधिकारी खुश्बू के खिलाफ तीन लाख 60 हजार 450 रुपये की वसूली का आदेश निरस्त कर दिया।
याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता योगेश सिंह बघेल ने रखा। मामले में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 92 अपात्र महिलाओं को चार लाख 31 हजार रुपये का भुगतान किया गया था। विभाग ने अधिकारी से 3.60 लाख रुपये की वसूली का आदेश 31 जनवरी 2023 को जारी किया था। उनकी अपील उप सचिव, मध्य प्रदेश शासन ने 30 मई 2023 को निरस्त कर दी थी। दरअसल, याचिकाकर्ता 10 अगस्त से नौ अक्टूबरए 2019 तक चिकित्सीय अवकाश पर थीं।
