वाशिंगटन/तेहरान | मध्य-पूर्व में तनाव उस समय अपने चरम पर पहुँच गया जब ईरान द्वारा अमेरिकी जासूसी ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद अमेरिका ने कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया दी। सोमवार को अमेरिकी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरान के गोरुक और केश्म द्वीपों को निशाना बनाते हुए भीषण बमबारी की। इस हमले में ईरानी सेना का रडार सिस्टम, ड्रोन कंट्रोल स्टेशन और मुख्य कमांड सेंटर पूरी तरह तबाह हो गए हैं। अमेरिका ने इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा में उठाया गया आवश्यक कदम बताया है।
कुवैत में हमला और बढ़ता तनाव
इस सैन्य गतिरोध का दायरा अब तेजी से बढ़ रहा है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमले किए, जिसमें पांच अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की खबर है। जानकारों का मानना है कि ईरान ने कुवैत को निशाना बनाकर यह संकेत दिया है कि क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देश भी उसकी जद में हैं। इस घटनाक्रम के बाद से खाड़ी देशों में सैन्य हलचल तेज हो गई है और स्थिति पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ती दिख रही है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास जारी इस संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका है। ईरान ने अपनी भूमिगत मिसाइल साइट्स को फिर से सक्रिय कर दिया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन शांति और संयम की अपील कर रहे हैं, लेकिन सैन्य गतिविधियों की तीव्रता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है।

