मिथुन चक्रवर्ती नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद खुद को समझने लगे थे अल पचिनो, फिर प्रोड्यूसर ने खोली एक्टर की आंखें

मुंबई, मिथुन चक्रवर्ती ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि ‘मृगया’ के लिए पहला नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद उनके अंदर घमंड आ गया था। वह खुद को महान अभिनेता समझने लगे थे।

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर मिथुन चक्रवर्ती ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं। पांच दशक से ज्यादा के करियर में उन्होंने हिंदी के साथ कई दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया। ‘डिस्को डांसर’, ‘डांस डांस’ और ‘कसम पैदा करने वाले की’ जैसी फिल्मों ने उन्हें खास पहचान दिलाई। हालांकि, सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने से पहले मिथुन ने काफी संघर्ष भी किया था।

एक इंटरव्यू में एक्टर ने अपने करियर के उस दौर का किस्सा सुनाया, जब पहला नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद उन्हें अपने अंदर घमंड महसूस होने लगा था। मिथुन चक्रवर्ती को साल 1977 में आई फिल्म ‘मृगया’ के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था। यह उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक थी। हालांकि, एक्टर के मुताबिक इस सम्मान के बाद उनके व्यवहार में बदलाव आने लगा था।

खुद को समझने लगे थे अल पचिनो
एक इंटरव्यू में मिथुन ने अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए बताया था कि नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद उन्हें लगने लगा था कि वह सबसे महान एक्टर हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस समय उनके अंदर अहंकार आ गया था। मिथुन ने बताया कि वह उस दौर में खुद को हॉलीवुड एक्टर अल पचिनो की तरह समझने लगे थे।

अल पचिनो के अभिनय करने लगे थे फॉलो
मिथुन अल पचिनो के अभिनय के अंदाज को फॉलो करने लगे थे और खुद को लेकर उनका रवैया भी बदल गया था। एक्टर के मुताबिक उनका व्यवहार इतना बदल गया था कि एक प्रोड्यूसर ने उन्हें देखकर बाहर जाने के लिए कह दिया था। मिथुन ने बताया कि इस घटना ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने व्यवहार और सफलता को देखने का नजरिया बदला।

संघर्ष भरे दिनों को आज भी याद करते हैं
मिथुन चक्रवर्ती ने अपने शुरुआती दिनों को बेहद मुश्किल बताया है। उन्होंने मुंबई में संघर्ष के दौरान फुटपाथ पर सोने तक की बात साझा की है। यही वजह है कि वह अपनी जिंदगी को संघर्ष और अनुभवों से भरी कहानी मानते हैं। मिथुन के मुताबिक कई लोगों ने उन्हें अपनी ऑटोबायोग्राफी लिखने की सलाह भी दी थी। हालांकि, उनका मानना था कि उनकी कहानी लोगों को प्रेरित करने के बजाय निराश कर सकती है। आज अपने लंबे करियर में कई सम्मान हासिल कर चुके मिथुन अपने संघर्षों और गलतियों को भी खुलकर याद करते हैं।

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