भारी आवाज और कांजीवरम साड़ी बनी पहचान, कभी स्कूल की म्यूजिक क्लास से निकाली गई थीं उषा उत्थुप

Usha Uthup Birthday Special: भारी-भरकम आवाज के साथ कांजीवरम साड़ियों और मैचिंग स्नीकर्स के अनोखे फैशन के लिए पहचानी जाने वाली सिंगर उषा उत्थुप के जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प पहलुओं पर एक खास नजर।

जब भी म्यूजिक इंडस्ट्री में एक ऐसी महिला की बात होती है जिसने लीक से हटकर अपनी एक अलग पहचान बनाई, तो जेहन में सबसे पहला नाम दिग्गज सिंगर उषा उत्थुप का आता है। अपनी विशिष्ट आवाज, माथे पर बड़ी सी बिंदी और पारंपरिक कांजीवरम साड़ियों के साथ उनकी अनूठी शैली हर किसी को आकर्षित करती है।

आज यानी 8 नवंबर को इस शानदार कलाकार का जन्मदिन है। संगीत प्रेमियों के बीच अपनी बेबाक शख्सियत के लिए फेमस उषा उत्थुप ने अपनी जिंदगी के सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उनकी यह कहानी सिर्फ एक सिंगर के आगे बढ़ने की नहीं है, बल्कि हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो समाज की रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़कर अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है।

कांजीवरम साड़ी के कपड़े से बनते हैं उनके खास स्नीकर्स
फैशन की दुनिया में अपने अलग फैशन को लेकर चर्चा में रहने वाली इस सिंगर का अंदाज वाकई बेहद निराला है। वे अपनी हर कांजीवरम साड़ी के बचे हुए या मेल खाते कपड़े से खास तौर पर स्नीकर्स तैयार करवाती हैं।

एक बार उन्होंने स्टेज पर ही अपने मोची सुशिल और मिस्री दास का जिक्र करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया था जो सालों से उनके लिए ऐसे अनोखे जूते बना रहे हैं। यह कांजीवरम स्नीकर्स वाला स्टाइल अब उनकी पहचान का एक अहम हिस्सा बन चुका है जो देखने में बेहद आकर्षक लगता है।

होटल के छोटे स्टेज से शुरू हुआ था सफर
आज वे भले ही बड़े म्यूजिक सरेमनी की शान हों, लेकिन उनके करियर की शुरुआत काफी साधारण परिस्थितियों में हुई थी। महज 20 साल की उम्र में उन्होंने चेन्नई के एक नाइट क्लब से अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत की थी।

इसके बाद उन्होंने कोलकाता और मुंबई के कई फेमस नाइट क्लबों और होटलों में अपनी कला का प्रदर्शन किया। दिल्ली के एक फेमस होटल में परफॉमेंस के दौरान उनकी मुलाकात बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर शशि कपूर से हुई थी जो उनकी सिंगिंग से खासे प्रभावित हुए और उन्हें फिल्मों में गाने का बड़ा मौका दिया।

बचपन में म्यूजिक की क्लास से दिया गया था बाहर
हर कोई यह जानकर हैरान रह जाएगा कि जिस आवाज के आज करोड़ों दीवाने हैं, उसे कभी स्कूल के दिनों में म्यूजिक क्लास से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। उनकी आवाज बाकी लड़कियों से काफी अलग और भारी थी, जिसके कारण शिक्षकों को वह सही नहीं लगी।

हालांकि म्यूजिक के लिए उनके गहरे लगाव को देखते हुए उन्हें केवल वाद्य यंत्र बजाने की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद उन्होंने कभी संगीत की कोई औपचारिक तालीम नहीं ली, फिर भी अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने रिकॉर्ड संख्या में गीत गाए और इतिहास रच दिया।

कई भाषाओं में जलवा बिखेरने वाली बेबाक आवाज
अपने लंबे और शानदार करियर में उन्होंने करीब 25 अलग-अलग भाषाओं में अपनी मधुर आवाज का जादू बिखेरा है जिसमें कई विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं। हालांकि, अपने अनोखे अंदाज और भारी आवाज के कारण उषा उत्थुप कई बार समाज में ताने और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

पद्म श्री और पद्म भूषण अवॉर्ड से हुईं सम्मानित
उषा उत्थुप ने पॉप, जैज, रॉक और फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने भारत के अलावा विदेशों में भी कई शानदार परफॉमेंस दीं। म्यूजिक में उनके योगदान के लिए साल 2011 में उन्हें पद्म श्री और 2024 में पद्म भूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। आज उनकी रंगीन साड़ियां, बड़ी बिंदी और दमदार आवाज उनकी खास पहचान बन चुकी हैं।

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