
विंध्य की डायरी
डा. रवि तिवारी
प्रदेश में अधिकारी बेलगाम हैं और जनता परेशान है. हालत यह है कि माननीय विधायकों की नहीं सुनी जाती तो आम जनता की भला कौन सुने. सिंगरौली में प्रभारी मंत्री संपतिया उईके बैठक ले रही थीं. भाजपा के ही विधायक रामनिवास शाह ने लंबित निर्माण कार्यो को लेकर जमकर सुनाया और कहा कि हम एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो जनता के सामने किस मुंह से वोट मांगने जाएंगेे. विधायक के कड़े तेवर देख कर मंत्री से लेकर अधिकारियों के भी पसीने छूटने लगे. विधायक जी का तेवर देख ननि के अधिकारियों के भी सुर बदल गये और परिस्थिति को देखते हुए प्रभारी मंत्री ने भी आयुक्त को समस्याओं को हल करने के लिये समय दिया. वहीं अब विपक्षी दल चुटकी ले रहे हैं कि जब सत्ताधारी विधायकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही तो जनता की भला कौन सुनेगा. विधायक तो ठीक हैं भाजपा के अन्य नेताओं ने भी कहा कि अधिकारी हम लोगो की भी नहीं सुनते हैं . दरअसल सिंगरौली में भाजपाईयों के बीच आपसी लड़ाई चल रही है और प्रभारी मंत्री को लेकर खेमेबाजी है यही वजह है कि जब भी प्रभारी मंत्री सिंगरौली पहुंचती हैं तो आरोपों का दौर शुरू हो जाता है. यह कोई पहला मामला नहीं है . इसके पहले भी भाजपा नेताओं की आपसी लड़ाई सामने आ चुकी है. फिर चाहे बहाना निर्माण कार्य को लेकर हो या फिर मिलने का समय न देना. आपसी खींचतान में भाजपा उलझी हुई है, असल लड़ाई वर्चस्व की है.
नाराज कांग्रेसियों को पढ़ाया एकता का पाठ
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान की रीवा में हवा निकल रही है. संगठन से अलग कई कांग्रेस नेता अपने हिसाब से राजनीति चमका रहे है. या दूसरे शब्दों में कहें संगठन के प्रति नाराजगी है जो समय-समय पर सामने आती रहती है. जिले में पहले से ही गुटबाजी चल रही थी और अब खुलकर सामने आ चुकी है. बिखरी कांग्रेस को मजबूत करने और नाराज कांग्रेसियों से मिलने प्रदेश के सह प्रभारी रणविजय सिंह लोचव रीवा पहुंचे और संगठन की नब्ज टटोलने के साथ नाराज कांग्रेसियों से मुलाकात की. खासकर नगर निगम के पार्षद जो बगावत की राह पर है, सभी को पार्टी की एकता और अनुशासन का पाठ एक बार फिर बढ़ाया गया है साथ ही कांग्रेस की गाइड लाइन का पालन करते हुए पार्टी को सशक्त बनाने का सुझाव दिया गया. शायद यह पहले प्रभारी नही हैं इसके पहले भी इस तरह के पाठ पढ़ाए जा चुके है. लेकिन कांग्रेस नेता अपने हिसाब से ही राजनीति करते है. संगठन उनके लिये महत्वपूर्ण नही छात्रप नेताओं के इर्दगिर्द राजनीति घूमती है. यही वजह है कि रीवा सहित विंध्य में कांग्रेस लकवा ग्रस्त है, अपने पुराने स्वरूप में नही आ पा रही है.
विंध्य में सूखे की आहट
विंध्य में इस समय बादलों की बेरूखी से सूखे के गंभीर संकेत मिल रहे है, बारिश की भारी कमी के कारण खरीफ फसलों की बोनी प्रभावित हुई. धान की रोपाई थम गई है और लगातार तेज धूप से खेत सूखने की कगार पर है. मानसून का देरी से आना और उसके बाद बादलों का रूठ जाना समूचे विंध्य में सूखे के हालात पैदा कर दिये है. कर्ज के बोझ में दबा किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए देख रहा है पर बेवफा हो चुके बादल विंध्य की धरती पर मेहरबान नही हो रहे है. सामान्य से कम हुई बारिश को लेकर मौसम वैज्ञानिक सहित किसान भी परेशान है. अकेले रीवा में केवल 150 मिली मीटर औसत वर्षा अभी तक हुई है, अमूमन यही हाल अन्य जिलों में है. विंध्य में धान का व्यापक उत्पादन होता है, लक्ष्य से कहीं ज्यादा कई बार उत्पादन हुआ है. लेकिन इस बार कम वर्षा ने किसानों की उम्मीद पर पानी फेर दिया है, हालत यह है कि धान की रोपाई किसान नही कर पाया. डेढ़ माह वर्षाकाल का बीत चुका है और अब डेढ़ माह का समय शेष है. इस बीच अगर बारिश नही होती तो निश्चित रूप से विंध्य को सूखा ग्रस्त घोषित करना पड़ेगा.
