नयी दिल्ली, 25 जुलाई (वार्ता) सरकार ने कहा है कि अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 23 जुलाई को घोषित 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क के दायरे से देश के 45 प्रतिशत निर्यात बाहर हैं और 55 प्रतिशत निर्यात ही इससे प्रभावित होंगे।
अमेरिका के वाणिज्य दूत (यूएसटीआर) ने 23 जुलाई को अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 के तहत भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी। यह शुल्क उन उत्पादों के अमेरिका में आयात को हतोत्साहित करने के लिए लगाया गया है जिसमें उत्पाद के निर्माण में बेगार का इस्तेमाल हुआ है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि अमेरिका को होने वाले निर्यात का एक बड़ा हिस्सा, जिस पर वर्तमान में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता – जैसे जेनेरिक दवाइयां, स्मार्टफोन और कुछ अन्य निर्दिष्ट उत्पाद – अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क के दायरे से बाहर रहेगा। इसके अलावा, अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 232 के तहत पहले से शामिल उत्पाद, जैसे इस्पात, एल्यूमिनियम और ऑटो पार्ट्स भी इस अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क के अधीन नहीं होंगे।
उल्लेखनीय है कि धारा 232 के तहत लगाये गये शुल्क सीमित अपवादों को छोड़कर लगभग सभी देशों पर समान रूप से लागू होते हैं। मंत्रालय ने अनुमान जताया है कि इन छूटों के कारण अमेरिका को होने वाले भारत के लगभग 45 प्रतिशत निर्यात के अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे। शेष 55 प्रतिशत निर्यात पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लागू होगा।
मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि जांच के दायरे में आये अधिकांश अन्य देशों की तुलना में भारत पर शुल्क का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा। यूएसटीआर ने इस वर्ष दो जून को भारतीय उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव किया था। सरकार ने इस जांच के दौरान यूएसटीआर के साथ लगातार संपर्क बनाये रखा। इसमें विस्तृत लिखित प्रस्तुतियां, आमने-सामने परामर्श और सार्वजनिक सुनवाई में भागीदारी शामिल थी। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत को अंतिम उपायों में अतिरिक्त शुल्क की निचली श्रेणी में रखा गया है, जिससे भारतीय निर्यात को प्रमुख क्षेत्रों में तुलनात्मक लाभ प्राप्त होगा।
अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के बारे में मंत्रालय ने बताया कि सरकार इस साल दो फरवरी को की गयी घोषणा तथा सात फरवरी को जारी संयुक्त वक्तव्य के अनुरूप व्यापार समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
