नई दिल्ली, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए केंद्र की मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। संपादकीय में कहा गया है कि दिल्ली में युवाओं के भारी विरोध प्रदर्शन और दमन के बीच जनता से संवाद खत्म हो चुका है, जो किसी भी तानाशाही शासन के पतन की शुरुआत का स्पष्ट संकेत है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
लेख में आरोप लगाया गया कि सरकार जनता की आवाज सुनने के बजाय पुलिस बल का खुलकर इस्तेमाल कर रही है। साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाते हुए यह दावा किया गया कि यदि एक मंत्री को हटाया गया तो पूरी कैबिनेट पर संकट आ सकता है।
संवादहीनता और इतिहास के उदाहरणों का जिक्र
बांग्लादेश और नेपाल के छात्र आंदोलनों का हवाला देते हुए संपादकीय में चेतावनी दी गई है कि जब शासक और जनता के बीच संवाद पूरी तरह टूट जाता है, तब जनता का धैर्य जवाब दे देता है और अंततः अहंकार तथा तानाशाही का पतन तय होता है।

