बगदाद/वॉशिंगटन, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के महज एक सप्ताह बाद, इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने अमेरिका का दौरा कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की है। यह अचानक हुआ बदलाव मध्य-पूर्व की राजनीति में एक बड़े परिवर्तन का संकेत है। इराक के इस कदम ने न केवल अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों को हैरान कर दिया है, बल्कि ईरान की उन उम्मीदों को भी करारा झटका दिया है, जिसमें वह अपने पड़ोसी देश से पूर्ण समर्थन की अपेक्षा कर रहा था।
ईरान और अमेरिका के बीच संतुलन की चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री जैदी इस दौरे के जरिए ईरान और अमेरिका के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इराक न तो ईरान से अपने ऐतिहासिक संबंधों को पूरी तरह खत्म करना चाहता है और न ही अमेरिका के साथ दुश्मनी मोल लेने का जोखिम उठाना चाहता है। ट्रंप और जैदी के बीच हुई इस बैठक में आर्थिक व्यापार और सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई है, जो इस क्षेत्र में इराक की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाती है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और संभावित परिणाम
इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तीखी बहस छिड़ गई है। इराक के इस ‘दोहरे रवैये’ को लेकर विश्लेषक बंटे हुए हैं, और अब दुनिया की नज़रें ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इराक की यह संतुलित कूटनीति उसे लाभ पहुंचाएगी या फिर उसे ईरान के भारी गुस्से का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, इराक का यह कदम मध्य-पूर्व की अस्थिर राजनीति में एक नए और अनिश्चित अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

