
ग्वालियर। छतरपुर किशनगढ़ निवासी 14 वर्षीय शिवम छत पर खेल रहा था। खेलते समय उसका पैर फिसल गया और वह लगभग एक मंजिल की ऊंचाई से नीचे लगे सिद्ध स्थान के चबूतरे पर लगे दो लोहे के दो भाला नुमा तीरों के ऊपर गिर पड़ा। इससे लोहे का नुकीला सिरा उसकी बाईं आंख के ठीक ऊपर माथे से मस्तिष्क में प्रवेश कर गया। लोहे का वह तीर खोपड़ी के विपरीत दिशा के फ्रंटल बोन के आर-पार हो गया । जबकि दूसरा लोहे का तीर उसके बाएं पैर में धंस गया।
14 वर्षीय शिवम की स्थिति इतनी दर्दनाक थी, कि न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ अविनाश शर्मा ने बताया कि एक बारगी तो वे खुद काँप गए थे। लेकिन उन्होंने और उनकी टीम ने बड़ी प्लानिंग और सावधानी से इस जटिल ऑपरेशन को सफल किया। लगभग 5 घंटे चले इस ऑपरेशन में बच्चे के किसी भी अंग में कोई भी हानि नहीं हुई।
*ये थे ऑपरेशन के चैलेंज*
इस ऑपरेशन के जो चैलेंज थे, इसमें लोहे के तीर को सुरक्षित रूप से निकालना, आंख की दृष्टि को यथासंभव सुरक्षित रखना, मस्तिष्क एवं खोपड़ी में बने दोष की मरम्मत करना तथा मस्तिष्कमेरु द्रव के रिसाव को रोककर संक्रमण के जोखिम को न्यूनतम करना था। मस्तिष्क,आंख, सिर को बचाना, इसमें किसी भी तरह के इन्फेक्शन को रोकना बड़ा चैलेंज था।
*मरीज की जांच कर पूरे जोखिम को समझा* –
न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अविनाश शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन से पहले मरीज की विस्तृत जांच की गई। नॉन-कॉन्ट्रास्ट सीटी स्कैन, सीटी एंजियोग्राफी, वेनोग्राफी तथा पैर का विस्तृत एक्स-रे किया गया। साथ ही कलर डॉप्लर जांच के माध्यम से विभिन्न रक्त वाहिकाओं की स्थिति का आकलन किया गया ।संभावित वैस्कुलर इंजरी एवं रक्तस्राव के जोखिम का अनुमान लगाना ।
*ऐसे की बच्चे के ऑपरेशन की प्लानिंग*
न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अविनाश शर्मा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए न्यूरोसर्जरी एवं जनरल सर्जरी विभाग के चिकित्सकों की संयुक्त रूप से विस्तृत ऑपरेटिव योजना तैयार की।
यह जटिल शल्यक्रिया न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अविनाश शर्मा के नेतृत्व में हुई। इसमें न्यूरोसर्जरी विभाग से डॉ. आनंद शर्मा तथा जनरल सर्जरी विभाग से प्रो. डॉ. एम. एम. मुद्गल एवं डॉ. अनिल शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शल्यक्रिया में एनेस्थीसिया विभाग, न्यूरोसर्जरी एवं जनरल सर्जरी के रेजिडेंट चिकित्सकों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
*5 घंटे चला ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रहा*
सफल ऑपरेशन के दौरान रोगी के मस्तिष्क एवं पैर में धंसे लोहे के तीर या बाण को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान संभावित रक्तस्राव के जोखिम को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरती गई और सभी जटिलताओं का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया गया। ऑपरेशन के बाद रोगी पूरी तरह सचेत एवं ओरिएंटेड है। उसके हाथ-पैर, मस्तिष्क,आंख सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं तथा उसकी दृष्टि भी सुरक्षित है।
