वर्षा ऋतु में कैसा हो खान-पान और दिनचर्या?

वर्षा ऋतु को आयुर्वेद में ‘वर्षा ऋतु’ कहा गया है। यह शरद ऋतु से पहले आती है और जुलाई से सितंबर तक रहती है। इस मौसम में पाचन अग्नि मंद हो जाती है और वात दोष बढ़ता है। साथ ही नमी और बैक्टीरिया के कारण पेट की बीमारियाँ भी बढ़ती हैं। इसलिए इस ऋतु में आहार-विहार का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
क्या खाना चाहिए? – पथ्य आहार
1. गर्म, हल्का और सुपाच्य भोजन लें। जैसे मूंग की दाल, पुराने चावल, जौ, गेहूं की रोटी
2. खट्टा, नमकीन और तेल-घी युक्त भोजन पाचन शक्ति बढ़ाता है। अदरक, लहसुन, जीरा, अजवाइन का प्रयोग करें
3. उबला हुआ पानी या सोंठ डालकर उबला पानी पिएं। यह कीटाणु नष्ट करता है
4. ताजा दही, छाछ, बेल का शरबत ले सकते हैं
5. शहद का सेवन लाभकारी है
क्या नहीं खाना चाहिए? – अपथ्य आहार
1. भारी, तले-भुने, बासी भोजन से बचें। समोसा, कचौरी, पिज्जा, बर्गर नुकसान करते हैं
2. पत्तेदार सब्जियाँ, बैंगन, मछली, दूध का सेवन कम करें। इनमें कीड़े और संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है
3. ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम बिल्कुल न लें। अग्नि मंद हो जाती है
4. दिन में सोना और रात में जागना वर्जित है
5. बाजार की कटी हुई सलाद और जूस न पिएं
क्या करें? – विहार
1. हल्का व्यायाम और योग करें। भीगने से बचें
2. साफ-सुथरे और सूखे कपड़े पहनें। नमी से फंगल इंफेक्शन होता है
3. शरीर पर तेल मालिश करके गर्म पानी से स्नान करें
4. मच्छरों से बचाव करें। घर में धूप-धुआं करें
