
ग्वालियर। मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक विजयवर्गीय से हुई 21 करोड़ 6 लाख रुपए की साइबर ठगी ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है। अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों ने इस पूरी रकम को चार लेयर में 20 हजार से ज्यादा बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक फैले हजारों बैंक खातों में खपा दिया।जांच में सामने आए 99 फर्स्ट लेयर बैंक अकाउंट अब साइबर टीम के रडार पर हैं। पुलिस ने अब तक करीब 2 करोड़ रुपए फ्रीज कराए हैं।
जांच में पता चला है कि ठगों ने रकम को एक-दो शहरों तक सीमित नहीं रखा। पैसा कन्याकुमारी से कश्मीर और गुजरात से कोलकाता तक फैले हजारों बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर आगे भेजा गया ताकि जांच एजेंसियों के लिए उसकी ट्रेल पकड़ना मुश्किल हो जाए। ठगों ने इस 21 करोड़ रुपए को हड़पने के लिए एक दो शहर नहीं बल्कि पूरे देश के बैंकों का उपयोग किया। चेन्नई से लेकर कश्मीर तक और गुजराज से लेकर कोलकाता तक हजारों बैंक खातों में ट्रांजेक्शन किए गए।
*जटिल ‘फोर-लेयर’ बैंकिंग नेटवर्क का हुआ इस्तेमाल*
साइबर टीम की नजर उन बड़े बैंक अकाउंट पर है जिनमें मोटी रकम ट्रांसफर की गई है। सायबर एक्सपर्ट्स और जांच अधिकारियों के अनुसार, ठगों ने इस पूरी राशि को पुलिस की पकड़ से दूर रखने के लिए एक जटिल ‘फोर-लेयर’ बैंकिंग नेटवर्क का इस्तेमाल किया। पिछले 7 महीनों के दौरान पीड़ित के खाते से निकले पैसों को 20 हजार से अधिक छोटे-बड़े ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए देश भर में घुमाया गया। खातों से रकम सबसे पहले सीधे तौर पर 99 बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर हुई थी। यह फर्स्ट लेयर मानी गई है। सायबर सेल की टीम ने इन 99 खातों की सूची तैयार कर उन्हें ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू की है। 99 खातों से पैसे तुरंत सेकंड, थर्ड और फोर्थ लेयर के तहत देश के कोने-कोने में मौजूद कई हजार संदिग्ध व फर्जी खातों में ट्रांसफर कर एटीएम, शॉपिंग वाउचर, कैश वाउचर और क्रिप्टो करंटी के जरिए निकाल लिए गए।
रोशनी घर रोड पर रहने वाले सीनियर सीए अशोक विजयवर्गीय से ठगी के लिए भारतीय नंबरों के अलावा एक विदेशी नंबर का भी उपयोग किया गया।
