मुंबई, 10 जुलाई (वार्ता) महाराष्ट्र विधानसभा में शुक्रवार को विपक्षी सदस्यों ने अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं की उपेक्षा, विशेष रूप से शैक्षणिक आरक्षण, छात्रवृत्ति और निष्क्रिय पड़े मौलाना आज़ाद अल्पसंख्यक आर्थिक विकास महामंडल के मुद्दे पर राज्य सरकार पर चौतरफा हमला बोला। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक वाली इस बहस की शुरुआत कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने की। उन्होंने राज्य के अल्पसंख्यक कार्य विभाग के पूरी तरह से निष्क्रिय होने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य के बड़े वार्षिक बजट के बावजूद इस विभाग को धन के लिए तरसाया जा रहा है। श्री पटेल ने कहा कि इस विभाग की स्थापना दिवंगत मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने अल्पसंख्यक समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए की थी। आज यह पूरी तरह से पंगु स्थिति में है और 100 करोड़ रुपये का अनुदान भी जुटाने में विफल रहा। उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि अगर ऐसी स्थिति में वह मंत्री होते, तो इस्तीफा दे देते।
विपक्ष द्वारा उठाई गई मांगों में बंबई उच्च न्यायालय की टिप्पणियों के अनुसार मुस्लिम समुदाय के लिए 10 प्रतिशत शैक्षणिक आरक्षण लागू करने पर सरकार का स्पष्ट रुख, लंबे समय से लंबित प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियों का तत्काल वितरण, और मौलाना आज़ाद अल्पसंख्यक आर्थिक विकास महामंडल का तत्काल पुनरुद्धार शामिल है। यह महामंडल विदेशी शिक्षा और छोटे पैमाने के उद्यमों के लिए ऋण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। सदन में माहौल तब और गरमा गया जब मंत्री नितेश राणे ने हस्तक्षेप किया और विपक्ष की मांग को चुनौती देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। उनके इस बयान पर विपक्षी सदस्यों ने तुरंत कड़ा विरोध जताया, जिससे सदन की कार्यवाही में कुछ समय के लिए बाधा उत्पन्न हुई।
इस हंगामे के बीच अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए श्री पटेल ने कहा कि यह मांग धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय के सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर की गई है।
सरकार की ओर से आधिकारिक जवाब देते हुए प्रभारी मंत्री नरहरि झिरवाल ने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार उच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी नहीं करेगी और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप उचित कार्रवाई शुरू करेगी। वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल ने स्पष्ट किया कि सरकार न्यायिक निर्देशों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि मणियार और कुरैशी जैसे कई मुस्लिम उप-समूह पहले से ही मौजूदा अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण ढांचे का लाभ उठा रहे हैं। श्री भुजबल ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि विपक्षी दलों की शेष मांगों पर व्यावहारिक रास्ता निकालने के लिए मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के साथ विचार-विमर्श किया जायेगा।

